फिक्स डिपॉजिट और बचत योजनाओं में ज्यादा ब्याज और कम समय में रकम दोगुनी-तिगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले वीएसीएल जन सहयोग क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के पदाधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि संस्था ने करीब 3000 लोगों से निवेश के नाम पर बड़ी रकम जमा कराई और बाद में पैसा वापस नहीं किया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण युवा मंच के संयोजक अशोक कुमार टाटा की शिकायत पर की गई। ईओडब्ल्यू जांच में प्रथम दृष्टया यह साबित हुआ कि संस्था के पदाधिकारियों ने लोगों को अधिक ब्याज, कम समय में रकम दोगुनी-तिगुनी होने और रोजगार दिलाने का झांसा देकर निवेश कराया।
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ईओडब्ल्यू थाना भोपाल में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष बीएस चौहान, अभिषेक शर्मा सहित कई संचालकों और सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी तथा मध्यप्रदेश निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 की धारा 6(1) के तहत FIR दर्ज की गई है। जांच में पता चला कि सोसायटी का पंजीयन 3 सितंबर 2013 को हुआ था और इसका कार्यालय भोपाल के अरेरा कॉलोनी स्थित 11 नंबर स्टॉप पर संचालित होता था। संस्था ने डेली डिपॉजिट, फिक्स डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मासिक आय योजना जैसी कई योजनाएं शुरू की थीं। निवेशकों को “जन सहयोग कैश क्रेडिट सर्टिफिकेट” जारी कर 12 प्रतिशत या उससे अधिक ब्याज देने का वादा किया जाता था।
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बैंक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि संस्था के खाते में करीब 1 करोड़ 64 लाख रुपये जमा हुए। जांच एजेंसी के अनुसार खाते का संचालन मुख्य रूप से राकेश शर्मा कर रहे थे। कई निवेशकों ने दस्तावेज और प्रमाणपत्र देकर बताया कि समय पूरा होने के बाद भी उनकी जमा राशि वापस नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि जब लोगों ने पैसा वापस मांगना शुरू किया तो संस्था का कार्यालय बंद रहने लगा और पदाधिकारियों ने मोबाइल फोन बंद कर लिए। कुछ निवेशकों के चेक भी बाउंस हुए। संस्था से जुड़े कर्मचारियों ने भी बयान दिया कि उन्हें वेतन तक नहीं मिला। ईओडब्ल्यू को जांच के दौरान ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनसे पता चला कि संस्था के संचालन के दौरान आरोपी राकेश शर्मा ने करोड़ों रुपये की जमीन खरीदी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
