फर्जी एमबीबीएस डिग्री और सरकारी भर्ती रैकेट का मास्टरमाइंड हीरा सिंह कौशल पर आखिरकार स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई कर दी है। हीरा सिंह को स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया है। हीरा सिंह सीहोर जिले के बिलकिसगंज में रेडियोग्राफर के पद पर पदस्थ था। अमर उजाला ने 21 मई को ‘MP: फर्जी डिग्री रैकेट के मास्टरमाइंड हीरा सिंह का आका कौन? 2021 में जेल गया फिर भी सरकारी नौकरी में लौट आया’ इस शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इस मामले को सीहोर सीएमएचओ डॉ.सुधीर डेहरिया और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे थे। इस संबंध में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला तक जानकारी पहुंची तो उन्होंने तुरंत गिरफ्तार हीरा सिंह को निलंबित करने के निर्देश दिए, जिसके बाद कार्रवाई हुई। बता दें दमोह और जबलपुर में तीन फर्जी एमबीबीएस की डिग्री से डॉक्टर पकड़ में आए थे। उन्होंने हीरा सिंह का नाम लिया था। इसके बाद दमोह पुलिस ने 20 मई को हीरा सिंह को भोपाल से गिरफ्तार किया। अब तक 12 फर्जी डिग्री से डॉक्टर के नाम सामने आए हैं। पुलिस मामले में जांच करर ही है। 

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फर्जी डिग्री और भर्ती घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और विभागीय संरक्षण पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि हीरा सिंह लंबे समय से स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम की संविदा भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लोगों के संपर्क में रहकर फर्जी डिग्री, जाली मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और नौकरी दिलाने का नेटवर्क संचालित कर रहा था।सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2021 में बैतूल में फर्जी नियुक्ति पत्र मामले में गिरफ्तार होकर जेल जाने के बावजूद वह दोबारा सरकारी नौकरी में कैसे लौट आया। उस मामले में आरोप था कि उसने युवाओं से लाखों रुपये लेकर सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया था और कई लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी किए गए थे। शिकायत के बाद वह करीब छह महीने जेल में रहा, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से विभाग में सक्रिय हो गया। 

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जानकारी के अनुसार हीरा सिंह वर्ष 2007 में मुलताई में एक्स-रे टेक्निशियन के पद पर नियुक्त हुआ था। इसके बाद उसने विभागीय संपर्कों और सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर कथित रूप से फर्जी नियुक्तियों और डिग्री नेटवर्क को फैलाया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने कितने लोगों को नौकरी दिलाई और इस पूरे नेटवर्क में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही। मामले में यह आरोप भी सामने आए हैं कि हीरा सिंह बिना नियमित ड्यूटी किए वेतन प्राप्त कर रहा था। वहीं, सीहोर सीएमएचओ डॉ. सुधीर डेहरिया ने बताया था कि आरोपी एक मई से अवकाश पर था और उसके खिलाफ लगे आरोपों की विभागीय जांच कराई जाएगी। मोह और जबलपुर में फर्जी डॉक्टरों के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने भोपाल से हीरा सिंह को गिरफ्तार किया था। अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा निलंबन की कार्रवाई के बाद पूरे मामले में विभागीय जवाबदेही और संभावित मिलीभगत की जांच तेज होने की संभावना है। 

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