इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में साइबर अपराधियों द्वारा एक छात्रा को निशाना बनाने का मामला प्रकाश में आया है। जानकारी के अनुसार, यहां एमबीए की पढ़ाई कर रही एक छात्रा के मोबाइल को हैक कर जालसाजों ने उसके बैंक खाते से जमापूंजी साफ कर दी। वारदात उस समय हुई जब पीड़िता ने अपने दूसरे मोबाइल नंबर पर पेमेंट वॉलेट एप्लीकेशन डाउनलोड कर अपना बैंक बैलेंस चेक किया था। इसी का फायदा उठाकर शातिर आरोपियों ने तकनीकी माध्यम से उसका डिवाइस हैक कर लिया और बैंक अकाउंट पूरी तरह से खाली कर दिया।

हीरानगर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

इस ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हुई पीड़िता नेहा राजपूत है। नेहा मूल रूप से खंडवा की निवासी है और वर्तमान में इंदौर के एक निजी कॉलेज से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की शिक्षा ग्रहण कर रही है। हीरानगर थाना पुलिस ने पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, यह पूरी वारदात 5 और 6 जून के मध्य की रात को अंजाम दी गई, जिसमें आरोपियों ने चालाकी से मोबाइल एक्सेस हासिल कर खाते से करीब 1 लाख 45 हजार रुपए की राशि पार कर दी।

बैलेंस चेक करने के बाद गायब हुई रकम

नेहा ने पुलिस अधिकारियों को आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसका एप्लीकेशन सीधे तौर पर बैंक खाते से लिंक है। पांच जून की रात को उसने सामान्य प्रक्रिया के तहत अपने खाते की बची हुई राशि की जांच की थी, उस समय उसके अकाउंट में पर्याप्त पैसे मौजूद थे। इसके अगले दिन नेहा की मां का फोन आया और उन्होंने मोबाइल फोन रिचार्ज करने के लिए कहा। जब नेहा ने अपनी मां के नंबर पर रिचार्ज करने के उद्देश्य से एप ओपन किया, तो तकनीकी खराबी के कारण रिचार्ज की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद जब उसने संदेह होने पर दोबारा अपना बैंक बैलेंस चेक किया, तो उसके होश उड़ गए क्योंकि खाते में केवल चार रुपए ही शेष बचे थे।

तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन से खाली हुआ बैंक खाता

खाते से अचानक इतनी बड़ी रकम गायब होने के बाद पीड़िता ने तुरंत संबंधित बैंक शाखा में जाकर अधिकारियों से संपर्क किया और अपने खाते का विवरण निकलवाया। बैंक स्टेटमेंट की जांच करने पर यह खुलासा हुआ कि जालसाजों ने बेहद कम समय में तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के माध्यम से पूरी राशि ट्रांसफर की थी। साइबर अपराधियों ने पहली बार में निन्यानवे हजार रुपए, दूसरी बार में छियालीस हजार रुपए और तीसरी बार में निन्यानवे रुपए की राशि अवैध रूप से ट्रांसफर की थी।

साइबर सेल की मदद से जांच में जुटी पुलिस

पीड़िता नेहा राजपूत ने आशंका व्यक्त की है कि किसी अज्ञात माध्यम से भेजे गए फर्जी लिंक अथवा किसी अन्य उन्नत साइबर तकनीक का इस्तेमाल कर अपराधियों ने उसके मोबाइल फोन का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था और इसके बाद इस वारदात को अंजाम दिया गया। हीरानगर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण को साइबर सेल को सौंप दिया है। पुलिस टीम बैंक खातों की डिटेल और आईपी एड्रेस के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास कर रही है।



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