इंदौर। नगर निगम ने शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) के नए नियम लागू कर दिए हैं। अब प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा उत्पन्न करने वाली संस्थाओं को थोक कचरा उत्पादक (बल्क वेस्ट जनरेटर – BWG) माना जाएगा। ऐसी संस्थाओं को अपने परिसर में ही गीले कचरे का निपटान करना होगा और कचरा प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था करनी होगी।
नगर निगम द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 लागू किए हैं। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हैं और अब नगर निगम सीमा क्षेत्र में इनका पालन अनिवार्य कर दिया गया है।
नए नियमों के दायरे में मैरिज गार्डन, होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला, छात्रावास, सामुदायिक भवन, रहवासी संघ और अन्य बड़े संस्थान शामिल होंगे। यदि ये संस्थान प्रतिदिन 100 किलो या उससे अधिक कचरा पैदा करते हैं, तो उन्हें थोक कचरा उत्पादक की श्रेणी में माना जाएगा।
नगर निगम ने ऐसे संस्थानों के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी थोक कचरा उत्पादकों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के केंद्रीकृत पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। संस्थानों में गीले, सूखे और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग रखना अनिवार्य होगा। गीले कचरे का निपटान परिसर में ही पिट कम्पोस्टिंग, बायोगैस, ओडब्ल्यूसी मशीन या अन्य स्वीकृत तरीकों से करना होगा।
इसके अलावा गीले कचरे से तैयार खाद का उपयोग करने और सूखे कचरे का अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से संग्रहण कराने की व्यवस्था भी करनी होगी। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाली संस्थाओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना भी लगाया जाएगा।
