ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तरल माइक्रो न्यूट्रिएंट तैयार करने की योजना को मंजूरी मिल गई है। …और पढ़ें

HighLights
- जीपीएस मैपिंग से मिट्टी की कमी का पता
- 100 प्रतिशत घुलनशील पोषक तत्व से होगा फायदा
- उर्वरकों के दुष्प्रभाव से मिट्टी को मिलेगी राहत
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय अब प्रदेश के किसानों के लिए एक नई पहल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए तरल रूप में माइक्रो न्यूट्रिएंट तैयार करेगा। इस पहल से किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार की मंजूरी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार से हरी झंडी मिल चुकी है। राज्य सरकार ने बायो रिसोर्स योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इस राशि का उपयोग विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक माइक्रो न्यूट्रिएंट प्लांट स्थापित करने के लिए किया जाएगा।
डिजिटल मैपिंग से मिट्टी की सटीक पहचान
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के विभिन्न जिलों की मिट्टी का जीपीएस के माध्यम से डिजिटल मानचित्र तैयार किया है। इस मैपिंग से यह स्पष्ट हो गया है कि किस क्षेत्र की मिट्टी में जिंक, आयरन, बोरान, सल्फर या मैंगनीज जैसे तत्वों की कितनी कमी है।
कस्टमाइज्ड माइक्रो न्यूट्रिएंट का होगा निर्माण
इस जानकारी के आधार पर अब ऐसे माइक्रो न्यूट्रिएंट तैयार किए जाएंगे, जो सीधे उसी तत्व की पूर्ति करेंगे जिसकी कमी मिट्टी में पाई गई है। यह माइक्रो न्यूट्रिएंट तरल रूप में होगा, जिससे मिट्टी इसे पूरी तरह और तेजी से अवशोषित कर सकेगी।
पारंपरिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव से राहत
वर्तमान में किसान जो उर्वरक उपयोग करते हैं, उनका बड़ा हिस्सा मिट्टी में घुल नहीं पाता। उदाहरण के तौर पर यूरिया का केवल 30-35 प्रतिशत हिस्सा ही उपयोगी होता है, जबकि 65 प्रतिशत से अधिक बेकार हो जाता है। इसी तरह फास्फोरस का 15-20 प्रतिशत और पोटाश का लगभग आधा हिस्सा ही प्रभावी रहता है। शेष हिस्सा मिट्टी में हानिकारक परत बनाता है।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर असर
जो खाद मिट्टी में नहीं घुलती, वह जमीन की सतह पर सख्त परत बना देती है। इससे मिट्टी धीरे-धीरे बंजर होने लगती है और पौधों की जड़ें गहराई तक नहीं जा पातीं।
नई तकनीक से होगा सुधार
विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जाने वाला माइक्रो न्यूट्रिएंट इस समस्या का समाधान साबित होगा। यह 100 प्रतिशत तक घुलनशील होगा और मिट्टी की वास्तविक जरूरत के अनुसार काम करेगा। इससे उर्वरकों का अपव्यय शून्य होगा और मिट्टी की उर्वरा शक्ति में सुधार आएगा।
विशेषज्ञों की राय
कुलगुरु डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला के अनुसार, यह माइक्रो न्यूट्रिएंट यूरिया और डीएपी का प्रभावी विकल्प बन सकता है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि होगी।
