नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। 40 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली निवासी ज्योति को बड़ा झटका लगा है। षष्ठम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि मामला गंभीर प्रकृति का है और फिलहाल आरोपित को राहत देना उचित नहीं होगा।
क्या है मामला
मामले के अनुसार, फरियादी शैलेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया है कि केशव शुक्ला और उसकी सहयोगी ज्योति ने मिलकर उसे संपत्ति खरीद के नाम पर धोखा दिया। आरोप है कि दोनों ने थाटीपुर चौराहे के पास स्थित शुक्ला भवन को सस्ते में दिलाने का लालच दिया और बताया कि इस सौदे में उसे करीब 70 लाख रुपये का फायदा होगा।
फरियादी के मुताबिक, ज्योति और केशव शुक्ला एक ब्रोकर के साथ उसके पास पहुंचे और भवन के दस्तावेज व नक्शा दिखाया। इसके बाद फरियादी ने अपने साथियों शिवम अग्रवाल और त्रयंबकेश अग्रवाल के साथ मिलकर 13 जनवरी 2025 को अनुबंध किया। सौदे की कुल राशि 2 करोड़ 27 लाख रुपये तय हुई।
अनुबंध के समय फरियादी ने आरटीजीएस के जरिए 25 लाख रुपये (दो किश्तों में 12.50-12.50 लाख) केशव शुक्ला को दिए। इसके बाद अलग-अलग समय पर 15 लाख रुपये और दिए गए। इस तरह कुल 40 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
आरोपित बार-बार रजिस्ट्री टालते रहे
आरोप है कि इसके बाद आरोपित बार-बार रजिस्ट्री टालते रहे और अंत में साफ कह दिया कि न तो जमीन की रजिस्ट्री करेंगे और न ही पैसे लौटाएंगे।
जांच में यह भी सामने आया कि केशव शुक्ला पहले ही इसी संपत्ति के नाम पर अन्य लोग- शैलेन्द्र सिंह कुशवाह और मनोज राजपूत से भी लाखों रुपये ले चुका था। साथ ही, नक्शे में हेरफेर कर शासकीय रास्ते को भी संपत्ति में शामिल दिखाया गया।
पुलिस थाना थाटीपुर में इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई है। राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक घनश्याम मंगल ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच अभी जारी है और आरोपित सहयोग नहीं कर रही है।
आरोपित पर गंभीर आरोप
कोर्ट ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपित पर गंभीर आरोप हैं। साथ ही, आरोपित के राज्य से बाहर रहने और जांच में सहयोग न करने की बात भी सामने आई। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने ज्योति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
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