इंदौर में आयोजित भव्य गर्भ संस्कार शिविर में 100 से अधिक गर्भवती माताओं और उनके परिजनों ने बड़े उत्साह के साथ सहभागिता की। इस कार्यक्रम में पारंपरिक गोदभराई संस्कार के साथ-साथ मातृत्व स्वास्थ्य, संतुलित जीवनशैली और सकारात्मक सोच पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। पूरे आयोजन के दौरान सांस्कृतिक गरिमा और पारिवारिक आत्मीयता का एक विशेष वातावरण निर्मित हुआ।

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योग और मानसिक स्वास्थ्य सत्र भी हुआ

कार्यक्रम का शुभारंभ एक विशेष योग सत्र से हुआ, जिसमें प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत शर्मा ने प्रतिभागियों को गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित रहने वाले आसनों, प्राणायाम और ध्यान की विभिन्न विधियां सिखाईं। लाइफ केयर हॉस्पिटल द्वारा आयोजित इस सत्र का मुख्य उद्देश्य माताओं को शारीरिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ मानसिक शांति प्रदान करना था।

विशेषज्ञ डॉक्टरों का मार्गदर्शन मिला

इसके पश्चात स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रजवाला तिवारी ने एक सारगर्भित प्रेजेंटेशन दिया। इसके माध्यम से उन्होंने गर्भवती माताओं और उनके परिजनों को गर्भावस्था के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों और त्यागी जाने वाली आदतों के बारे में विस्तार से समझाया। वहीं डॉ. कनकप्रिया तिवारी ने प्रश्नोत्तरी सत्र के दौरान उपस्थित महिलाओं की शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान किया।

फिजियोथेरेपी और आहार विज्ञान की जानकारी दी

फिजियोथेरेपी सत्र में विशेषज्ञों ने सही दिनचर्या, बैठने-उठने के उचित तरीकों और उन अभ्यासों की जानकारी दी जो सामान्य प्रसव में सहायक होते हैं। आहार विशेषज्ञ डॉ. संवेदिता मालवीय ने संतुलित पोषण और खान-पान पर प्रभावी प्रेजेंटेशन देकर उचित डाइट चार्ट साझा किया।

सांस्कृतिक रस्मों में भावुक हुई माताएं

सत्रों के बाद दंपतियों के लिए रोचक फन एक्टिविटी और गेम्स आयोजित किए गए, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक गोदभराई की रस्म रही, जिसे डॉ. ब्रजवाला तिवारी और डॉ. कनकप्रिया तिवारी द्वारा संपन्न कराया गया। इस भावुक क्षण में कई दंपतियों की आंखें नम हो गईं। आयोजन में डॉ. इशिता यादव, डॉ. मुस्कान चौहान और अस्पताल की पूरी विशेषज्ञ टीम मौजूद रही।

गर्भावस्था को एक भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा बताया

इस अवसर पर डॉ. ब्रजवाला तिवारी ने बताया कि पिछले 18 वर्षों से इस शिविर का आयोजन कर रहे हैं और अब तक 2000 से अधिक दंपतियों को इसका लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था केवल एक शारीरिक अवस्था नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा है। सकारात्मक वातावरण और सही मार्गदर्शन से सामान्य प्रसव की संभावना को बढ़ाया जा सकता है।



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