‘इंदौर के यातायात की बेहाली और समाधान’ विषय को लेकर प्रेस क्लब और संस्था सेवा सुरभि ने एक परिचर्चा का आयोजन किया, जिसमें बेंगलुरु से आए यातायात विशेषज्ञ आशीष वर्मा ने कहा कि अभी इंदौर और भोपाल को मेट्रो की आवश्यकता ही नहीं है। भविष्य में जब यह चलेगी तो ज्यादा यात्री नहीं मिलेंगे। ट्रैफिक मैनेजमेंट में पुलिस की कोई भूमिका कई देशों में नहीं है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि हमारे शहर में जनसंख्या का दबाव है। वाहन लगातार बढ़ रहे हैं। लोगों में जागरूकता भी बढ़ाना पड़ेगी। वे यातायात के नियमों को तोड़ने वालों पर नजर रखते हैं। ट्रैफिक को ठीक करने के लिए सुविधाजनक पब्लिक ट्रांसपोर्ट जरूरी है। कारें बढ़ेंगी तो प्रदूषण भी बढ़ेगा। अच्छी जीवनशैली में हवा और पानी सबसे पहली आवश्यकता है लेकिन वो ही ठीक नहीं मिल रहा है। इंदौर में बीआरटीएस इसलिए फेल हुआ क्योंकि उस पर बसों की संख्या नहीं बढ़ाई, फीडर रूट पर ध्यान नहीं दिया। बसों का नेटवर्क बढ़ाना होगा। कारों की संख्या कम करने पर जोर दिया जाए।
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सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि आने वाले 25 साल के हिसाब से इंदौर के ट्रैफिक की प्लानिंग होना चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञ की मदद ली जाएगी। अतुल शेठ ने कहा कि ट्रैफिक की समस्या को लेकर बहुत बात हो गई। अब समाधान पर बात होना चाहिए। शहर के बिगड़े ट्रैफिक को सुधारना अब जरूरी हो गया है।
पत्रकार अमित मंडलोई ने कहा कि ट्रैफिक को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी लेना होगी। हमें शहर को जागरूक करना होगा। इंदौर की सामूहिकता में बदलाव लाने की ताकत है। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार अरविंद तिवारी ने किया।
