नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। संगीन अपराधों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाने वाले पुलिस के प्रशिक्षित उम्रदराज डॉग्स की कार्यकुशलता ने उसे प्रदेशभर में पहचान दिलाई है। चोरी, लूट, हत्या और अन्य जटिल मामलों की जांच में उसकी सफलता के कारण अब पुलिस विभाग के साथ-साथ आम नागरिकों में भी उसकी मांग बढ़ गई है।
यही वजह है कि बीएसएफ अकादमी में स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण लेने के लिए कतार लगने लगी है। वर्तमान में वहां नस्लदार श्वानों के साथ-साथ सामान्य श्वानों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
डॉबरमैन नस्ल का श्वान बना मिसाल
संगीन अपराधों की पड़ताल में पुलिस का मददगार बना उमदराज डॉबरमैन नस्ल का श्वान है। उसकी सूंघने की क्षमता और अपराधियों तक पहुंचने की दक्षता ने उसे विशेष पहचान दिलाई है। इसी कारण प्रशिक्षण केंद्र में नस्लदार श्वानों के अलावा आम लोगों के श्वानों को भी प्रशिक्षण देने की मांग लगातार बढ़ रही है।
नशा, हथियार और विस्फोटक डिटेक्ट करने में लेकर काम में ले सकेंगे
सीन पर से अहम सुराग जुटाने का काम करने वाले ये श्वान अब नशा, हथियार और विस्फोटक डिटेक्ट करने में लेकर दूसरे कई कामों में उपयोग किए जा सकेंगे। टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में आम लोगों के आवेदन पर श्वानों के प्रशिक्षण की व्यवस्था शुरू की गई है। पहले यह सुविधा केवल सरकारी एजेंसियों को ही उपलब्ध थी, लेकिन अब सामान्य नागरिक भी इसका लाभ ले सकेंगे।
66 दिन का विशेष प्रशिक्षण
केंद्र में प्रशिक्षण के दौरान श्वानों को 66 दिन का विशेष कोर्स कराया जाता है। पहले पांच घंटे कोई डिटेक्ट नहीं हो पाता, लेकिन इसके बाद एक हफ्ते का समय श्वान को ट्रेनिंग देने में लगता है। इसके बाद उसे नशीले पदार्थ, विस्फोटक और अन्य वस्तुओं की पहचान कराई जाती है। सेंधगीरी, चोरी, हत्या, बचाव, पेट्रोल आदि क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। औसतन 10 साल इनकी सेवाएं रहती हैं। यदि सही तरीके से देखभाल की जाए तो यह अवधि और बढ़ सकती है।
ब्रीड नहीं, सूंघने की क्षमता मायने रखती है
बीएसएफ अकादमी पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत यह देखा गया है कि कई बार देसी और ब्रीडेड श्वानों में सूंघने की क्षमता लगभग समान होती है। इसी आधार पर प्रशिक्षण केंद्र ने अब आम नागरिकों के श्वानों को भी प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है।
सामान्य लोग भी करा सकेंगे श्वानों की ट्रेनिंग
प्रश्न : क्या केवल उमदराज जैसे श्वानों को ही ट्रेनिंग दी जाती है?
उत्तर : नहीं। पहले सरकारी एजेंसियों के श्वानों को ही प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन अब आम नागरिक भी अपने श्वानों को प्रशिक्षण दिला सकते हैं।
प्रश्न : श्वान की उम्र कितनी होनी चाहिए?
उत्तर : प्रशिक्षण के लिए श्वान की उम्र 7-9 माह होनी चाहिए। उम्र के साथ सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
प्रश्न : क्या देसी श्वानों को भी प्रशिक्षित किया जा सकता है?
उत्तर : हां। यदि श्वान की सूंघने की क्षमता अच्छी है तो उसे भी प्रशिक्षित किया जा सकता है।
