कान्ह-सरस्वती नदी पुनर्जीवन अभियान समिति के सदस्यों ने कान्ह रिवर फ्रंट परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान स्थानीय पार्षद सुरेश टाकलकर, क्षेत्रीय रहवासी और परियोजना की क्रियान्वयन संस्था के तकनीकी दल के सदस्य भी मौजूद रहे। अभ्यास मंडल की इस पहल का मुख्य उद्देश्य परियोजना के तकनीकी पहलुओं को गहराई से समझना तथा नागरिकों के विभिन्न सुझावों को अधिकारियों तक पहुंचाना था।

1200 मीटर क्षेत्र में रिवर फ्रंट विकसित किया जाएगा

निरीक्षण के दौरान उपस्थित तकनीकी दल द्वारा बताया गया कि लगभग 1200 मीटर क्षेत्र में रिवर फ्रंट विकसित करते हुए नदी का सुव्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पूरी परियोजना के अंतर्गत नदी को 25 मीटर चौड़ा एवं लगभग 3 मीटर गहरा बनाया जाना प्रस्तावित है। जल शुद्धिकरण के प्रयासों के तहत गंदे नालों की टैपिंग कर सीवेज को पूरी तरह से अलग प्रवाहित किया जाएगा, जबकि वर्षा जल के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह यथावत रखा जाएगा। नदी के दोनों किनारों को गैबियन संरचनाओं के माध्यम से सुदृढ़ किया जाएगा तथा सीमित क्षेत्रों में लैंडस्केपिंग एवं वृक्षारोपण की गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त हरसिद्धि एसटीपी से उपचारित जल लाकर नदी में निरंतर प्रवाहित करने की योजना के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

नदी को नदी रहने दो…

भ्रमण के दौरान स्थानीय पार्षद सुरेश टाकलकर ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना में नागरिक सहभागिता सुनिश्चित करने तथा स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष बल दिया। कान्ह सरस्वती नदी का इंदौर जल संसाधन संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। नदी को नदी रहने दो के मूल मंत्र पर विचार रखते हुए पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. ओ.पी. जोशी ने कहा कि किसी भी नदी पुनर्जीवन परियोजना का उद्देश्य केवल सतही सौंदर्यीकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि नदी की वास्तविक प्राकृतिक पारिस्थितिकी, जल गुणवत्ता, जैव विविधता एवं भूजल पुनर्भरण की पुनर्स्थापना होना सबसे आवश्यक है। अभ्यास मंडल अध्यक्ष रामेश्वर गुप्ता ने अपने विचार साझा करते हुए कहा की परियोजना के दीर्घकालीन लाभ ओर लागत प्रभावशील का सार्वजनिक मूल्यांकन होना बहुत जरूरी हैं।

अतिक्रमण, पर्यावरण के मानक और जल गुणवत्ता की भी बात उठी

पर्यावरणविद् डॉ. दिलीप वागेला ने जल प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उपचारित जल का उपयोग नदी पुनर्जीवन में सकारात्मक रूप से किया जा सकता है, किंतु इसके लिए जल गुणवत्ता की सतत निगरानी और पर्यावरणीय मानकों का कठोरता से पालन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही संदीप खानवलकर ने नदी के प्राकृतिक जलीय चक्र, भूजल पुनर्भरण एवं जलीय वनस्पतियों को भी इस पूरी परियोजना में अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया। पूर्व अभियंता नूर मोहम्मद कुरैशी ने नदी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नदी किनारे स्थित सभी अतिक्रमणों के विधिसम्मत निराकरण की आवश्यकता बताई और कहा कि नदी का सीमांकन तुरंत हो।

अत्यधिक वर्षा की स्थिति में परियोजना की कार्यक्षमता का आंकलन भी जरूरी

निरीक्षण के दौरान यह महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आया कि प्रस्तावित 25 मीटर चौड़ाई एवं 3 मीटर गहराई की संरचना की बाढ़ वहन क्षमता, दोनों ओर प्रस्तावित हरित क्षेत्र एवं पाथवे की व्यवहारिकता को आम जनता के लिए सार्वजनिक किया जाना चाहिए। विस्तृत हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन और मास्टर प्लान को भी जनता के बीच ले जाना चाहिए। भ्रमण के दौरान उपस्थित जागरूक नागरिकों ने वर्षाकाल में प्रदूषित जल को नदी में प्रवेश से रोकने की व्यवस्था, स्टॉप डैम आधारित जल प्रबंधन की लागत तथा अत्यधिक वर्षा की स्थिति में परियोजना की कार्यक्षमता से जुड़े कई गंभीर प्रश्न भी उठाए।

स्थानीय रहवासी अनिल बोरगांवकर और सुनील बेनवंशी ने इस संयुक्त निरीक्षण भ्रमण को बेहद उपयोगी बताते हुए इस योजना में जनता द्वारा पूर्ण सहयोग करने की अपील की। इस विशेष अवसर पर डॉ माला सिंह ठाकुर, वैशाली खरे, प्रणीता दीक्षित, उदय बापट, श्रीकांत धर्माधिकारी, सुशील पटेल सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। अंत में इस संयुक्त भ्रमण को अत्यधिक उपयोगी बताते हुए सभी प्रतिभागियों ने यह आशा व्यक्त की कि नागरिकों द्वारा दिए गए इन महत्वपूर्ण सुझावों एवं उठाए गए तकनीकी प्रश्नों पर परियोजना के आगामी चरणों में गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा।



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