ग्वालियर-चंबल में नौतपा इस बार पूरी तरह नहीं तप सका। बारिश और तेज हवाओं ने गर्मी कम कर दी। मौसम विभाग ने 6 जून तक वर्षा, आंधी और ओलावृष्टि की संभावना …और पढ़ें

HighLights
- नौतपा के बीच बारिश ने गर्मी का असर घटाया।
- चार दिन बाद मौसम बदला, तापमान तेजी से गिरा।
- छह जून तक वर्षा और तेज हवाओं के आसार।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। 25 मई से 2 जून तक चलने वाले नौतपा में सीजन की सर्वाधिक गर्मी पड़ती है। इस बार भी नौतपा की शुरुआत भीषण गर्मी से हुई और चार दिन तक लोग बेहाल रहे। तापमान 44 से 45 डिसे के बीच झूलता रहा, लेकिन इसके बाद वर्षा ने भिगोकर नौतपा की गर्मी को ठंडा कर दिया।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुमान के मुताबिक, आगामी छह जून तक अंचल में तेज हवा के साथ वर्षा हो सकती है और आकाशीय बिजली चमक सकती हैं। पिछले चार दिन से अंचल का तापमान 35 से 37 डिसे के बीच में अटका हुआ है। लोगों को गर्मी से तो राहत है, लेकिन उमस से परेशानी हो रही है।
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ सहित चक्रवातीय सिस्टम बने हुए हैं। इनके असर से अंचल के आसमान में बादल छाए हुए हैं। वर्षा होने की लगातार संभावना बनी हुई है। ऐसे में अंचल में दिन व रात का तापमान से कम बना हुआ है। ऐसे में अंचल में गर्मी का प्रकोप न के बराबर है।
हालांकि सिस्टमों के सक्रिय रहने से अंचल के वातावरण में लगातार नमी आ रही है। ऐसे में न केवल नमी अधिक है, बल्कि वर्षा होने की संभावना बनी हुई है, इसलिए आगामी छह जून तक वर्षा हो सकती है। नौतपा 25 मई से शुरू हुआ और 28 मई तक तो तापमान 44 डिसे के ऊपर बना रहा, लेकिन 28 जून की रात से बदले मौसम ने नौतपा की हवा निकाल दी। वर्षा व तेज हवा की वजह से मौसम ठंडा हो गया। गर्मी से यह रात लगातार चल रही है। ऐसे में नौतपा का असर खत्म-सा हो गया।
आगामी दिनों में वर्षा के साथ-साथ ओलावृष्टि की संभावना भी
मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के वैज्ञानिक डॉ अरुण शर्मा के मुताबिक अभी पश्चिमी विक्षोभ व चक्रवातीय सिस्टम के असर से ग्वालियर-चंबल के ऊपर बादल छाए हैं। इस दौरान तेज हवा के साथ वर्षा तो हो ही सकती है। कहीं-कहीं पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। ओलावृष्टि की दृष्टि से श्योपुर व मुरैना जिले अधिक संवेदनशील हैं। इन जगहों के लिए ओरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। हालांकि इस बार मानसून चार जून को केरल से टकराएगा। ऐसे में अंचल में भी मानसून को आने में देरी होगी।
नौतपा कम तपने से मानसून होता है कमजोर
नौतपा के नहीं तपने से मानसून कमजोर हो सकता है और वर्षा कम होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा तेज गर्मी न पड़ने से हानिकारक कीड़े, बैक्टीरिया और वायरस नष्ट नहीं होते, जिससे फसलों में कीटों का प्रकोप और बीमारियों के बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है।
धार्मिक महत्व
सूर्य रोहिणी नक्षत्र में करता है प्रवेश ज्योतिषाचार्य के अनुसार नौतपा साल के वे नौ सबसे गर्म दिन होते हैं, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। प्रकृति के संतुलन, अच्छी वर्षा और बेहतर कृषि के लिए इसका तपना बेहद जरूरी है। तेज गर्मी से हवा का कम दबाव बनता है, जो मानसूनी बादलों को अपनी ओर खींचता है।
