नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अवैध रेत के फड़ (भंडारण) पर हुई गोलीबारी ने शहर को दहला दिया। नियम-कानून को ठेंगे पर रखकर सड़क पर खुलेआम शताब्दीपुरम, दीनदयाल नगर और शहर के मुहानों पर स्थित इलाकों में अवैध रेत का कारोबार हो रहा है, लेकिन खनिज विभाग और पुलिस को यह नजर नहीं आता।
बुधवार को हुए गोलीकांड ने खनिज विभाग और खाकी की इस सांठगांठ को उजागर कर दिया गया है। सिर्फ इसी इलाके में नहीं लगे, बल्कि झांसी रोड, शिवपुरी लिंक रोड, पुरानी छावनी, बहोड़ापुर, गिरवाई, मुरार बड़ागांव, सिरोल इलाके में भी जगह-जगह रेत के अवैध भंडारण हैं। बुधवार को हुआ हत्याकांड बताता है कि अवैध रेत का काम करने वाले रसूखदारों और भ्रष्ट तंत्र के बीच सांठगांठ का नेक्सस कितना गहरा है।
जब हादसा, तभी टूटती है नींद….फिर सजने लगती हैं रेत की अवैध मंडियां
गोलीबारी, हत्या और सड़क हादसे में जान जाने के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटती है। कुछ दिन कार्रवाई चलती है। इसके बाद फिर से रेत की अवैध मंडियां सजने लगती हैं। रेत के अवैध फड़ और अनाधिकृत रूप से शहर के मुहानों पर रेत की मंडियां लग रही हैं। इससे पहले जब सड़क हादसे में पांच युवकों की मौत सड़क हादसे में हुई थी, तब खनिज विभाग और पुलिस ने रेत की अवैध मंडियों को हटवाया था। चार दिन प्रशासन की कार्रवाई चली, इसके बाद फिर हालात पहले जैसे ही हो गए।
आरोपित पकड़ा, फिर भी चक्काजाम, भीषण गर्मी में लोग परेशान
आरोपित को इस घटना के बाद पकड़ लिया गया था। इसके बाद भी मृतक के स्वजन, रिश्तेदारों ने चक्काजाम कर दिया। एयरपोर्ट तिराहा पर पूरे दिन जाम लगाए रखा। इससे यहां आने वाली यात्री बस, दूसरे वाहन फंस गए। भीषण गर्मी में जाम के टार्चर ने लोगों को खूब परेशान किया। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हुए। कई लोग एयरपोर्ट से आ रहे थे और कई लोगों को एयरपोर्ट फ्लाइट के लिए जाना था।
इन्हें यहां से पैदल ही जाना पड़ा। बच्चे गर्मी के कारण बसों में रोने लगे। यहां पहुंचने के लिए इंटरनेट मीडिया पर भी अलग-अलग वर्ग के संगठनों के नेताओं ने मैसेज चलाए। पूरे शहर का फोर्स यहां मौजूद था। शव आ जाने तक यहां लोग बैठे रहे। एएसपी अनु बेनीवाल यहां मौजूद थीं। उन्होंने कई बार मांग पूछी लेकिन धरने पर बैठे लोग यह कहते रहे-उन्हें सिर्फ फोन आया था, इसलिए बैठे हैं। शाम को शव आने पर बोले कि मृतक के स्वजन को हथियार लाइसेंस दिए जाएं, आरोपित का लाइसेंस रद किया जाए, चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। यह मांग मानने का आश्वासन दिया, फिर जाम खोला गया।
सरकारी जमीन पर चल रहे हैं रेत के फड़
जिस रेत के फड़ पर गोलीकांड हुआ, वह सरकारी जमीन पर है। इसी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने थे। शताब्दीपुरम से शनिश्चरा की ओर जाने वाले पूरे रास्ते पर यही हालात हैं। कई जगह तो पूरी सड़क ही अवैध रूप से रेत का भंडारण करने वालों ने घेर रखी है। यहां बिना नंबर के डंपर, ट्रैक्टरों का दिनभर आवागमन होता है। खुलेआम यातायात नियमों को तोड़ा जाता है, लेकिन यह किसी को नजर नहीं आता। इसे लेकर जनमानस में सवाल है। लोग अवैध वसूली से भी जोड़ते हैं।
