ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने आनलाइन बेटिंग एप ‘खिलाड़ी’ के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 25 May 2026 11:01:03 PM (IST)Updated Date: Mon, 25 May 2026 11:01:03 PM (IST)

खिलाड़ी बेटिंग ऐप से 3 करोड़ की ठगी, कॉल सेंटर की आड़ में चल रहा था फर्जीवाड़ा, ग्वालियर पुलिस ने 10 को दबोचा
खिलाड़ी बेटिंग एप के जरिए तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा( एआई फोटो)

HighLights

  1. खिलाड़ी बेटिंग एप के जरिए तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा
  2. सरगना समेत चार आरोपित तीन दिन की पुलिस रिमांड पर, छह भेजे गए जेल
  3. उप्र और बिहार से लाए गए युवकों के स्वजन बोले- नौकरी के नाम पर भेजा था ग्वालियर

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने आनलाइन बेटिंग एप ‘खिलाड़ी’ के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में अब तक तीन करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। मामले में पुलिस ने 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से चार को रिमांड पर लिया गया है, जबकि छह आरोपितों को जेल भेज दिया गया। क्राइम ब्रांच ने बहोड़ापुर स्थित शिव नगर में देवेंद्र उर्फ देवा यादव के घर छापा मारकर कार्रवाई की थी। यहां बाकायदा काल सेंटर संचालित किया जा रहा था। गिरोह आनलाइन बेटिंग एप ‘खिलाड़ी’ का पैनल लेकर लोगों से ठगी कर रहा था।

उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले कई युवकों को पकड़ा

पुलिस ने गिरोह के सरगना देवेंद्र उर्फ देवा यादव और पवन यादव सहित उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले कई युवकों को पकड़ा था। पूछताछ में पता चला कि यह युवक दोनों आरोपितों के इशारे पर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। मामले में देवेंद्र उर्फ देवा यादव, पवन यादव, रिशु साह निवासी दानापुर पटना और विकास पुत्र शिवसर्जन साह को कोर्ट से तीन दिन की रिमांड पर लिया गया है। वहीं गोलू साह, मिथुन मंडल, पुनीत बघेल, सागर साह, चंदन कुमार और संतोष राजभर को जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार आरोपितों के बैंक खातों और एटीएम कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जिन बैंकों के एटीएम कार्ड मिले हैं, उन्हें विस्तृत जानकारी के लिए ईमेल भेजे गए हैं। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम पहले म्यूल खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद पैसा दूसरे खातों में भेजकर एटीएम कार्ड के जरिए नकद निकाला जाता था।

युवकों के स्वजन भी ग्वालियर पहुंच गए

इधर, उत्तर प्रदेश और बिहार से पकड़े गए युवकों के स्वजन भी ग्वालियर पहुंच गए। स्वजनों का कहना है कि उन्होंने अपने बेटों को नौकरी करने के लिए ग्वालियर भेजा था। युवक भी घरवालों को बताते थे कि वे काल सेंटर में काम करते हैं। परिवार को यह जानकारी नहीं थी कि वे साइबर ठगी के गिरोह से जुड़े हुए हैं।



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