मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब सप्लाई संकट भी गहराने लगा है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल के दाम तीन बार बढ़ चुके हैं, वहीं राजधानी भोपाल समेत कई जिलों के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की किल्लत देखने को मिल रही है। भोपाल पेट्रोल पंप संगठन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि सप्लाई प्रभावित होने की सबसे बड़ी वजह हॉर्मुज रूट पर बना अंतरराष्ट्रीय संकट है। उन्होंने कहा कि देश में आने वाले करीब 50% क्रूड ऑयल की सप्लाई इसी रूट से होती थी, जो फिलहाल प्रभावित है। इससे कंपनियों तक पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल नहीं पहुंच पा रहा।

भोपाल में पेट्रोल 111.71 और डीजल 96.85 प्रति लीटर पहुंचा

मध्यप्रदेश में महंगाई ने आम आदमी की रफ्तार पर फिर ब्रेक लगा दिया है। सिर्फ 10 दिनों के भीतर तीसरी बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। नई बढ़ोतरी के बाद राजधानी भोपाल में पेट्रोल 111.71 और डीजल 96.85 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं उज्जैन और जबलपुर जैसे शहरों में पेट्रोल 112 प्रति लीटर के पार निकल चुका है। तेल कंपनियों ने इस बार पेट्रोल पर 87 पैसे और डीजल पर 91 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है, लेकिन मध्यप्रदेश में टैक्स के असर से कई शहरों में कीमतें 1 या उससे ज्यादा बढ़ गईं।

मांग ज्यादा, सप्लाई 40% तक कम

अजय सिंह के मुताबिक भोपाल में पेट्रोल और डीजल की डिमांड लगातार बढ़ रही है, लेकिन कंपनियां मांग के मुकाबले 30 से 40% तक कम सप्लाई दे पा रही हैं। उन्होंने कहा कि पब्लिक डिमांड बढ़ने के कारण पेट्रोल पंपों के इंडेंट ज्यादा हैं, लेकिन रिफाइनरी से पर्याप्त माल नहीं मिलने के कारण स्थिति बिगड़ रही है।

भोपाल के 150 पेट्रोल पंप रोज हो रहे ड्राई

राजधानी भोपाल में हर दिन करीब 12 से 13 लाख लीटर डीजल और 9.5 लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती है। जिले में कुल 192 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से करीब 150 पंप रोजाना एक से दो घंटे के लिए ड्राई हो रहे हैं। हालांकि पंपों की संख्या ज्यादा होने के कारण लोगों को तुरंत बड़ा संकट महसूस नहीं हो रहा, क्योंकि एक पंप पर ईंधन खत्म होने पर दूसरे पंप से मिल जाता है।

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ग्रामीण इलाकों में ज्यादा परेशानी

अजय सिंह ने कहा कि सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में दिख रहा है। बड़े शहरों को प्राथमिकता मिलने के कारण गांवों में सप्लाई और ज्यादा प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति रही तो सोयाबीन बोनी प्रभावित हो सकती है। क्योंकि बारिश के 12 घंटे के भीतर बोनी जरूरी होती है और किसानों को डीजल नहीं मिला तो खेती का काम रुक सकता है। पेट्रोल पंप संगठन का कहना है कि तेल कंपनियों ने अब दूसरे देशों से नए अनुबंध किए हैं, ताकि हॉर्मुज रूट पर निर्भरता कम हो सके। हालांकि सप्लाई व्यवस्था सामान्य होने में अभी दो से तीन महीने का समय लग सकता है।

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आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसकी सबसे बड़ी वजह है। ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। कच्चा तेल महंगा होने से सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा और घाटे की भरपाई के लिए दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया।



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