शातिर साइबर ठग अब पुलिस पोर्टल से एफआइआर जानकारी निकालकर लोगों को फर्जी पुलिस अधिकारी बन कॉल कर ठगी कर रहे हैं। राज्य साइबर पुलिस ने सावधानी बरतने की …और पढ़ें

HighLights
- ठग सीसीटीएनएस और ई-एफआइआर पोर्टल से जानकारी निकाल रहे हैं
- एफआइआर में दर्ज मोबाइल नंबरों पर कॉल कर ठगी हो रही
- आरोपी खुद को एसएचओ, सीएसपी या पुलिसकर्मी बताकर धमकाते हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शातिर ठगों ने ईडी, सीबीआई अफसर बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर कई वारदात कीं। अब तरीका बदल लिया है। अब सीधे पुलिस के ही सिस्टम में सेंध लगाकर सीसीटीएनएस और ई-एफआइआर पोर्टल से केस की जानकारी लेकर ठगी कर रहे हैं।
इसे लेकर राज्य साइबर पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। ठग एफआइआर में दिए गए मोबाइल नंबर पर कॉल करते हैं। एफआइआर में केस की पूरी जानकारी होती है। इसके बाद कार्रवाई तेज करने या अन्य झांसा देकर ठगी कर रहे हैं।
देखिये… ठग इस तरह बना रहे हैं निशाना
सीसीटीएनएस, ईएफआइआर पब्लिक पोर्टल से एफआइआर निकालकर इसमें से फरियादी का नंबर निकालते हैं, एफआइआर में केस की जानकारी पढ़ते हैं। इसके बाद ठग खुद कॉल करते हैं। यह खुद को एसएचओ, सीएसपी या एसपी कार्यालय का कर्मचारी बताते हैं। फिर एफआइआर में कार्रवाई, चालान जल्द पेश कराने का झांसा देते हैं।
लोगों के खिलाफ सबूत होने की बात कहते हैं और धन की मांग करते हैं। कई बार तो शाति ठग वीडियो कॉल करते हैं और वर्दी पहनकर ही सामने बैठ जाते हैं। कैस की पूरी जानकारी इनके पास होती है और लोगों को विश्वास हो जाता है कि यह असली पुलिस अधिकारी हैं।
वॉट्सएप पर ही कॉल
शातिर ठग वॉट्सएप पर ही कॉल कर रहे हैं। सीधे कॉल करने से बचते हैं। वॉट्सएप पर करने से इनकी लोकेशन ट्रैस करना आसान नहीं होती है। जिस नंबर से वॉट्सएप चालू होता है, वह नंबर बंद होता है, लेकिन इस पर वॉट्सएप चालू होता है।
यह रखें सावधानी
- अगर एफआइआर दर्ज कराने के बाद इस तरह का कोई कॉल आए तो सीधे संबंधित थाने या विवेचक से संपर्क करें।
- एफआइआर की मूल कॉपी मिलती है, इसमें विवेचक का नंबर होता है।
- इस तरह के कॉल आने पर भुगतान कतई न करें। कभी भी पुलिस या कोई जांच एजेंसी रुपये नहीं मांगती। ऐसी स्थिति में साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
