राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में वन विभाग द्वारा कछुआ संरक्षण अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में उसेद घाट पर बनाई गई अस्थाई कछुआ हेचरी से वनमंडल अधिकारी हरिश चंद्र बघेल एवं अधीक्षक भिंड श्याम सिंह चौहान की मौजूदगी में 83 कछुओं को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया।
वन विभाग के अनुसार राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में कछुओं के संरक्षण के लिए बरोली घाट, बटेश्वरा घाट, उसेद घाट और सांकरी घाट पर कुल चार अस्थायी कछुआ हेचरी बनाई गई हैं। इन हेचरियों में अब तक कुल 395 नेस्ट सुरक्षित किए गए हैं।
विभागीय जानकारी के मुताबिक चारों हेचरियों से अब तक 7344 कछुआ शावक निकल चुके हैं, जिन्हें सुरक्षित रूप से चंबल नदी के प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जा चुका है। वहीं कुछ नेस्ट में अभी भी हेचिंग की प्रक्रिया जारी है। वन अधिकारियों ने बताया कि कछुओं का संरक्षण चंबल नदी के पारिस्थितिक संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि इन दुर्लभ जीवों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
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मुरैना डीएफओ हरीश चंद्र बघेल ने बताया देवरी सेंटर में पले 80 कछुओं को महुआ घाट पर रिलीज किया गया है। इसके बाद हमने अधिकारियों और अपनी टीम के साथ मिलकर चंबल नदी के आसपास के घाटों पर सघन पेट्रोलिंग की। उन्होंने बताया कि पेट्रोलिंग का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अवैध उत्खनन की जानकारी जुटाना था। जांच के दौरान नदी के सभी घाट बंद पाए गए और कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली।
वन मंडल अधिकारी मुरैना हरीश चंद्र बघेल के अनुसार गुरुवार को चंबल नदी में 80 कछुए छोड़े गए हैं। सभी देवरी सेंटर में पले थे। जिन्हें महुआ घाट पर नदी में रिलीज किया गया। इसके बाद चंबल नदी के आस पास के घाटों पर अधिकारियों और अपनी टीम के साथ मिलकर पेट्रोलिंग की गई। अवैध उत्खनन की जानकारी ली। पेट्रोलिंग के दौरान सभी घाट बंद मिले।
