उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने एक फैसले में कहा है कि किसी शासकीय कर्मचारी को केवल अनुपस्थित रहने के आधार पर बिना नियमित विभागीय जांच के सेवा से …और पढ़ें

HighLights
- ड्यूटी से गायब रहने पर कर्मचारियों की नहीं छीन सकते नौकरी
- MP High Court का फैसला पहले करनी होगी जांच
- 29 दिसंबर 2021 का अपीलीय आदेश निरस्त कर दिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने एक फैसले में कहा है कि किसी शासकीय कर्मचारी को केवल अनुपस्थित रहने के आधार पर बिना नियमित विभागीय जांच के सेवा से नहीं हटाया जा सकता। न्यायमूर्ति अमित सेठ ने विनोद राव शिर्के की याचिका स्वीकार करते हुए विभाग द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश और अपीलीय आदेश दोनों निरस्त कर दिए।
अनुपस्थिति और निलंबन का मामला
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह सिसोदिया ने बताया कि विनोद राव शिर्के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय विदिशा में कंप्यूटर ऑपरेटर (गणक) के पद पर पदस्थ थे। विभाग के अनुसार वह 21 नवंबर 2015 से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित थे।
इसके बाद 30 दिसंबर 2016 को उन्हें निलंबित किया गया और एक फरवरी 2017 को विभागीय आरोप पत्र जारी किया गया। आरोपों में अनधिकृत अनुपस्थिति, अनुशासनहीनता और विभागीय आदेशों की अवहेलना शामिल थी।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन
अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी को गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करना अनिवार्य है। अदालत ने यह भी माना कि विभाग ने बिना नियमित जांच के सीधे सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया। इसी आधार पर कोर्ट ने 25 फरवरी 2019 का सेवा समाप्ति आदेश और 29 दिसंबर 2021 का अपीलीय आदेश निरस्त कर दिया।
कोर्ट के आगामी निर्देश
हाई कोर्ट ने विभागीय जांच को आरोप पत्र जारी होने की स्थिति से पुनः शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि यदि याचिकाकर्ता अब सेवानिवृत्त हो चुका है तो उसे निलंबन अवधि में मानते हुए नियमों के तहत अस्थायी पेंशन का लाभ दिया जाए। अदालत ने कर्मचारी को 45 दिन के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर आरोप पत्र का जवाब देने के निर्देश भी दिए हैं।
