प्रियंक शर्मा, नईदुनिया ग्वालियर। नगर निगम के कर्मचारियों की मिलीभगत का एक अजब कारनामा सामने आया है। निगम की केदारपुर स्थित लैंडफिल साइट से एक पुराना टैंकर मरम्मत के लिए 18 किमी दूर कार्यशाला के लिए मई महीने में निकला तो सही, लेकिन 41 दिन में भी ये सफर पूरा नहीं कर पाया है।
इस टैंकर के कार्यशाला के लिए निकलने की एंट्री तो केदारपुर स्थित लैंडफिल साइट के रजिस्टर में मिलती है, लेकिन आज दिनांक तक कार्यशाला में टैंकर पहुंचने का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है यानी यह टैंकर बीच रास्ते में ही गायब हो गया, लेकिन इसकी मरम्मत के आदेश देने वाले अफसरों ने आज तक ये सुध नहीं ली कि टैंकर कार्यशाला पहुंचा या नहीं और फिर मरम्मत होकर वापस लौटकर क्यों नहीं आया।
बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की मिलीभगत से इस टैंकर को बीच रास्ते से ही गायब कर बेच दिया गया है। टैंकर को लेकर निकला ड्राइवर भी कभी जानकारी न होने और कभी मांडरे की माता स्थित हाइड्रेंट पर टैंकर खड़ा करने की बात कह रहा है।
रजिस्टर में निकासी दर्ज, कार्यशाला में एंट्री नहीं
- दरअसल, केदारपुर स्थित लैंडफिल साइट पर लंबे समय से एक टैंकर खड़ा था। इस टैंकर के जरिए साइट पर पानी की जरूरत को पूरा किया जाता था। पिछले 16 मई को मरम्मत का बहाना बनाकर इस टैंकर को केदारपुर प्लांट से ट्रैक्टर क्रमांक एमपी 07 एबी 7135 में जोड़कर निकाला गया।
अधिकारियों के बयान
केदारपुर से कार्यशाला के लिए भेजे गए टैंकर की जानकारी सुपरवाइजर से लेता हूं। उसी आधार पर पता चल पाएगा कि टैंकर कहां है। संदीप मौर्य
हमारे रिकार्ड के मुताबिक केदारपुर से कोई भी टैंकर मरम्मत के लिए कार्यशाला नहीं आया है। ऐसी कोई एंट्री हमारे पास नहीं है। पुष्पेंद्र श्रीवास्तव, नोडल
केदारपुर के किस टैंकर की आप बात कर रहे हैं, वो मुझे याद नहीं है। मैं तो निगम के टैंकरों को चलाता हूं। अगर कुछ याद आता है, तो आपको बताऊंगा। कृष्णपाल सिंह, विनियमित
यह बहुत गंभीर मामला है। इस मामले में रिकार्ड चेक कराकर दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा। गड़बड़ी करने वालों को बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा। संघ प्रिय, आयुक्त नगर निगम।
मांडरे की माता हाइड्रेंट पहुंचकर हुआ गायब
- दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के अलावा केदारपुर की ओर जाने वाले टैंकरों को मांडरे की माता स्थित हाइड्रेंट से भरा जाता है। यहां निगम का क्षेत्रीय कार्यालय भी बना हुआ है, साथ ही बाहर हाइड्रेंट लगा हुआ है। यहीं से अधिकतर निगम के व निजी टैंकरों को भरा जाता है।
- बताया जा रहा है कि लैंडफिल साइट से निकला ये टैंकर मांडरे की माता स्थित हाइड्रेंट के पास से ही ठिकाने लगा दिया गया। यही कारण है कि आज तक ये टैंकर कभी कार्यशाला नहीं पहुंचा है।
