ग्वालियर हाई कोर्ट ने कहा कि मामूली विवादित राशि के लिए पूरा बैंक खाता फ्रीज करना उचित नहीं है। अदालत ने खाता चालू करने और केवल विवादित रकम सुरक्षित र …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 09:50:33 AM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 10:04:17 AM (IST)

1,527 रुपये की विवादित राशि के लिए बरपा हंगामा, हाई कोर्ट ने फटकारा, कहा- ठगी के नाम पर पूरा बैंक खाता फ्रीज करना गलत
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने साइबर ठगी से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने बैंक खाता डी-फ्रीज करने के निर्देश।
  2. मात्र 1527 रुपये विवाद पर खाता फ्रीज किया गया।
  3. पूरी राशि अपराध से जुड़ी होने का प्रमाण नहीं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जांच एजेंसियां किसी विवादित राशि की सुरक्षा के लिए बैंक खाते पर कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन मामूली रकम के विवाद में पूरे खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है।

न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने शाबू बंजारा की याचिका पर सुनवाई करते हुए बैंक को खाता डी-फ्रीज करने के निर्देश दिए हैं। मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता के बैंक खाते पर कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की पुलिस द्वारा दर्ज साइबर अपराध शिकायतों के आधार पर रोक लगा दी गई थी। शिकायतों से जुड़ी विवादित राशि मात्र 1,527.80 रुपये थी, लेकिन इसके बावजूद पूरा बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खाते में मौजूद अन्य धनराशि तक पहुंच नहीं होने से उसे आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी बैंक खाते को पूरी तरह फ्रीज करने के गंभीर नागरिक परिणाम होते हैं, क्योंकि इससे खाताधारक अपनी वैध जमा राशि का उपयोग नहीं कर पाता।

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अदालत ने खाता चालू करने के दिए निर्देश

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  • न्यायालय ने पाया कि जांच एजेंसियों ने ऐसा कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि खाते में मौजूद पूरी राशि अपराध से संबंधित है। हाई कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह खाता तत्काल प्रभाव से चालू करे और केवल 1,527.80 रुपये की विवादित राशि को एफडीआर या लियन के रूप में सुरक्षित रखे।
  • यह राशि जांच और आपराधिक कार्रवाई के अंतिम परिणाम तक सुरक्षित रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों के हितों की रक्षा जरूरी है, लेकिन कार्रवाई निष्पक्ष, तर्कसंगत और अनुपातिक होनी चाहिए।


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