चैंबर चुनाव में तकरीबन हमेशा दो हाउसों के उम्मीदवारों के बीच में मुकाबला होता है, लेकिन फिलहाल ऐसा लग रहा है कि इस बार एक हाउस के अध्यक्ष उम्मीदवार व …और पढ़ें

HighLights
- व्हाइट हाउस से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे वर्तमान अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल
- उपाध्यक्ष के लिए सुनील अग्रवाल और संयुक्त सचिव के लिए दीपक पमनानी प्रत्याशी घोषित
- जाति समीकरण और दिग्गजों की साख का दांव, चुनाव में दिखेगा विधानसभा जैसा रोमांच
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। चैंबर ऑफ कामर्स का चुनावी महासंग्राम शुरू हो गया है। अभी चुनाव की घोषणा ही हुई है और अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन चुनाव में रोमांच आना शुरू हो गया है। चैंबर चुनाव में तकरीबन हमेशा दो हाउसों के उम्मीदवारों के बीच में मुकाबला होता है, लेकिन फिलहाल ऐसा लग रहा है कि इस बार एक हाउस के अध्यक्ष उम्मीदवार व दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार के बीच ही मुकाबला होगा। हालांकि चैंबर से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि इस बार मामला अधिक प्रतिष्ठा का बन गया है।
इसलिए इस चुनाव में विधानसभा चुनाव जैसे समीकरण व पैंतरे देखने को मिल सकते हैं। यानी जाति समीकरण से लेकर वोटरों को लुभाने के लिए विभिन्न तरीके और एक उम्मीदवार को पटकनी देने के लिए दूसरे हाउस से हाथ मिलने जैसी स्थिति भी आगामी समय में देखी जा सकती है। इधर व्हाइट हाउस ने अपने संयुक्त सचिव पद के लिये दीपक पमनानी ओर उपाध्यक्ष पद के लिये सुनील अग्रवाल के नाम घोषित किये है। संयुक्त अध्यछ पद के लिए घोषणा नही की है।
इसलिए बना प्रतिष्ठा का चुनाव
इस बार अभी तक चैंबर अध्यक्ष पद के लिए दो उम्मीदवार सामने आए हैं। एक ह्वाइट हाउस से पारस जैन प्रत्याशी व दूसरे वर्तमान अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल जो पूर्व ह्वाइट हाउस से ही निर्वाचित हुए थे, उन्हें ह्वाइट हाउस ने उम्मीदवार न बनाते हुए पारस जैन को बनाया। ऐसे में प्रवीण अग्रवाल बगावत कर बिना किसी हाउस के कारोबारियों के समर्थन के सहारे मैदान में उतर आए हैं। चूंकि दोनों ही एक ही हाउस से हैं, ऐसे में चुनाव कुछ ज्यादा रोमांचक हो गया है।
अध्यक्ष पद के दोनों उम्मीदवार राजनीति के दो दिग्गज खेमों से
मंगलवार को माधव मंडपम में शहर के 1500 से अधिक व्यापारियों ने बैठक की और प्रवीण अग्रवाल को समर्थन दिया। व्यापारियों की इस बैठक ने दोनों ही हाउसों के समीकरणों को बिगाड़ा है और चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर विचार करने के लिए विवश कर दिया है। लोगों का कहना है कि अभी तक जो अध्यक्ष पद के दावेदार सामने आए हैं, वे राजनीति से जुड़े दो दिग्गजों के खेमों से हैं। दोनों की प्रतिद्वंद्विता जग जाहिर है। ऐसे में यह चुनाव राजनीतिक जैसा होने लगा है।
