एआरएआइ के बदलाव के कारण प्रदेश में बाडी मेकरों का काम बंद जैसा हो गया है क्योंकि विशिष्ट माडल की शर्त लागू हैं। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 20 May 2026 01:31:42 PM (IST)Updated Date: Wed, 20 May 2026 01:54:29 PM (IST)

स्लीपर बसों की जांच-पड़ताल में जुटा परिवहन विभाग उलझा... एआरएआइ से स्वीकृत बस मॉडल, फिर भी नहीं रुक रहे हादसे
सोशल मीडिया

HighLights

  1. एसी के चक्कर में हो रही अत्यधिक वायरिंग
  2. जरा सी स्पार्किंग से लग रही आग
  3. जांच में गायब मिले इमरजेंसी गेट

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्लीपर बसों में लगातार हादसों के बाद प्रदेश में परिवहन विभाग ने जांच पड़ताल शुरू की है लेकिन इन्हीं बसों को लेकर उलझन बढ़ गई है। पहले बस बाडी कोड के तहत आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरआइ) की ओर से मंजूरी दी जाती थी। इसके बाद बस बाडी मेकरों को अप्रूवल दिया जाने लगा।

अब वर्तमान में विशिष्ट बस माडल का अप्रूवल एआरएआइ की ओर से अधिकृत बाडी मेकर को दिया जाता है। बस संचालक हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग, लाइट, एसी का वेंट जैसी यात्री सुविधाएं दी जाती हैं। इससे तारों का जंजाल तैयार हो जाता है और जरा सी स्पार्किंग में आगजनी की घटना हो जाती है। स्लीपर बसों में चालक अपना केबिन बंद कर लेता है।

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बता दें कि प्रदेशभर में परिवहन विभाग द्वारा सेफ्टी आडिट में यात्री सुरक्षा के मद्देनजर बसों के भीतर भी जांच पड़ताल की जा रही है। लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारी असमंजस में हैं क्योंकि बसों की बाडी मेकिंग और उसके अंदर मोडिफिकेशन को लेकर अलग-अलग स्थितियां मिल रहीं हैं। पांच महीने पहले ही विशिष्ट माडल की स्वीकृति दिए जाने की व्यवस्था शुरू हुई है, अब हादसे रोकने के लिए परिवहन विभाग के अधिकारी मंथन कर रहे हैं। एआरएआइ के बदलाव के कारण प्रदेश में बाडी मेकरों का काम बंद जैसा हो गया है क्योंकि विशिष्ट माडल की शर्त लागू हैं।



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