नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही शहर में आवारा कुत्तों का आक्रामक व्यवहार एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। पिछले पौने तीन महीनों में रेबीज संक्रमण के कारण सात लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें दो ग्वालियर के निवासी थे। इस संवेदनशील स्थिति के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण में जीने का मौलिक अधिकार है और सार्वजनिक सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि खतरनाक या रेबीज से संक्रमित हो चुके कुत्तों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत नियंत्रित किया जा सकता है। कोर्ट ने नवंबर 2025 में दिए गए अपने निर्देशों को दोहराते हुए कहा कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हाईवे जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए। चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश का पालन करने में लापरवाही बरती गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
रोजाना 150 से 200 मरीज पहुंच रहे इंजेक्शन लगवाने: शहर के हजार बिस्तर अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 80 मरीज एंटी-रेबीज वैक्सीन का पहला डोज लगवाने पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल मुरार व हजीरा सिविल अस्पताल में रोजाना औसतन 100 से अधिक डाग बाइट केस दर्ज हो रहे हैं। हाल के महीनों में शहर में रेबीज के लक्षण वाले सात कुत्तों की भी मौत हुई है। मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की मांग बढ़ रही है।
90 प्रतिशत कुत्तों का अधूरा वैक्सीनेशन बना खतरा: विशेषज्ञों के अनुसार नगर निगम के अभियान में अधिकांश कुत्तों को पहला एंटी-रेबीज टीका तो लग जाता है, लेकिन 21 दिन बाद लगने वाला दूसरा डोज और वार्षिक बूस्टर डोज नहीं लग पाता। इससे वैक्सीन का प्रभाव घटकर लगभग 50 प्रतिशत रह जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि नवंबर 2025 में दिए गए निर्देशों के तहत स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हाईवे जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर रूप से संक्रमित या खतरनाक कुत्तों के मामलों में नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा सकती है। आदेश का पालन न करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
बचाव और सावधानी जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कुत्ता काटने पर घाव को तुरंत 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोना चाहिए और बिना देरी के एंटी-रेबीज इंजेक्शन का पूरा कोर्स लेना चाहिए। नागरिकों से अपील की गई है कि वे आवारा कुत्तों को अनावश्यक रूप से परेशान न करें। गर्मी में उनके लिए पानी की व्यवस्था करें, जिससे उनका आक्रामक व्यवहार कम हो सके।
निगम की तैयारियां सुस्त
शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नगर निगम को मुख्य रूप से जिम्मेदारी दी गई है। इसमें शहर में सभी शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को पकड़कर आश्रय स्थल पहुंचाया जाना है। इसके अलावा कुत्तों की नसबंदी भी की जानी है, लेकिन एक बैठक के बाद ये तैयारियां बहुत सुस्त गति से चल रही हैं। सिर्फ एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में प्रतिदिन 18 से 20 कुत्तों की नसबंदी का काम चल रहा है। कुत्तों के आश्रय स्थल के लिए पिपरोली स्थित ग्वाला नगर में एक हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है, जिसके उपयोग परिवर्तन को मेयर इन काउंसिल से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन परिषद से अंतिम अनुमति मिलना बाकी है। आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए फिलहाल कोई बड़ा अभियान संचालित नहीं हो रहा है।
जिम्मेदारों ने कहा…
सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। अब नगर निगम व संबंधित विभाग को तेजी से कार्य कर कुत्तों पर नियंत्रण करने की जरुरत है। -डा. अवधेश कुमार चंसौलिया सेवानिवृत्त प्राध्यापक।
बढ़ते डाग बाइट और रेबीज केसों को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर नियंत्रण और संक्रमित कुत्तों के प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी थे। मानकों का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई की जाए। -डा. अशोक मिश्रा, पूर्व विभागाध्यक्ष, पीएसएम विभाग, जेएएच।
