उर्दू शायरी और गजल की दुनिया के चमकते सितारे, मशहूर शायर बशीर बद्र का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से साहित्य और अदब जगत में शोक की लहर है। भोपाल में रहकर उन पर पीएचडी करने वाले साहित्यकार डॉ. अंजुम बाराबंकी ने उन्हें 20वीं और 21वीं सदी की नई गजल का सबसे महत्वपूर्ण शायर बताया।


डॉ. अंजुम बाराबंकी ने कहा कि बशीर बद्र केवल एक शायर नहीं, बल्कि नई गजल के ट्रेंड सेटर थे। उन्होंने उर्दू शायरी में ऐसे प्रयोग किए, जिन्होंने गजल की भाषा और शैली को नई पहचान दी। उनका मानना था कि बशीर बद्र के बिना उर्दू शायरी का कोई भी संकलन या चयन पूरा नहीं माना जा सकता। उन्होंने बताया कि बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया था और उनके नाम आज भी शैक्षणिक उत्कृष्टता का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्हें उस दौर में प्रतिष्ठित पुरस्कार और छात्रवृत्तियां मिली थीं, जब इतनी राशि किसी युवा शिक्षक के वेतन से भी अधिक मानी जाती थी।

 



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