पिछले दो साल लगातार अच्छी बारिश के बाद इस बार मध्यप्रदेश के लिए मानसून चिंता बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। भारतीय मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। अल-नीनो के असर के चलते मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे खेती, पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में औसतन 37.3 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार केवल 30 से 32 इंच बारिश होने का अनुमान है। यानी सामान्य से करीब 15 से 20 फीसदी कम पानी गिर सकता है। मानसून की एंट्री भी तय समय से 5 से 8 दिन देरी से होने की संभावना है और 20 जून के बाद ही प्रदेश में दस्तक दे सकता है।

47 जिलों में कम बारिश, सिर्फ 8 जिलों को राहत की उम्मीद

पूर्वानुमान के मुताबिक भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सागर, नर्मदापुरम समेत 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के संकेत हैं। वहीं ग्वालियर, भिंड, नीमच, दमोह, अनूपपुर, उज्जैन, अलीराजपुर और बड़वानी ऐसे जिले हैं जहां सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है।

जून रहेगा कमजोर, जुलाई से बढ़ सकती है रफ्तार

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जून में बारिश का दौर कमजोर रहेगा। हालांकि जुलाई में मानसून कुछ रफ्तार पकड़ सकता है और कई इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है।

अल-नीनो बिगाड़ सकता है बारिश का गणित

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रशांत महासागर में बन रही अल-नीनो की स्थिति मानसूनी हवाओं को कमजोर कर सकती है। इसका सीधा असर मध्यप्रदेश की बारिश पर पड़ेगा। अल-नीनो सक्रिय होने पर कई बार प्रदेश में सूखे जैसे हालात बनते हैं और वर्षा का वितरण असंतुलित हो जाता है।

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खेती और जलसंकट की बढ़ी चिंता

कम बारिश का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश से सोयाबीन, गेहूं और चने का उत्पादन बढ़ा था, लेकिन इस बार किसानों की चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर इंदौर, ग्वालियर सहित कई शहर पहले से जल संकट झेल रहे हैं। ऐसे में मानसून कमजोर रहा तो पेयजल संकट और गहरा सकता है।

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पिछले साल बरसे थे मेघ, इस बार उलट तस्वीर

साल 2025 में मध्यप्रदेश में सामान्य से 21 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी और कई जिलों में रिकॉर्ड पानी गिरा था। भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिलों में बहुत अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। लेकिन इस बार मौसम विभाग का अनुमान बिल्कुल उलट है और मानसून को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है।

 



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