हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने GRMC की वरिष्ठ चिकित्सक एवं रेडियो डायग्नोसिस विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अक्षरा गुप्ता को मिली पदोन्नतियों को चुन …और पढ़ें
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HighLights
- हाई कोर्ट ने जीआरएमसी की पूर्व एचओडी डॉ. अक्षरा गुप्ता के पक्ष में सुनाया फैसला
- तीसरे बच्चे के जन्म के नियम को आधार बनाकर पदोन्नति को दी गई थी चुनौती
- अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय बाद पदोन्नति निरस्त करना न्यायसंगत नहीं
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) की वरिष्ठ चिकित्सक एवं रेडियो डायग्नोसिस विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष (एचओडी) डॉ. अक्षरा गुप्ता को मिली पदोन्नतियों को चुनौती देने वाली सभी चार रिट अपीलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि भले ही सेवा नियमों के तहत तीसरे बच्चे के जन्म के कारण पदोन्नति पर प्रश्न उठाए जा सकते थे, लेकिन 10 वर्ष से अधिक समय बाद पदोन्नति को निरस्त करना उचित नहीं होगा।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने यह फैसला डॉ. पंकज कुमार यादव तथा जीआरएमसी प्रशासन की ओर से दायर चार अलग-अलग रिट अपीलों पर सुनाया। ये अपीलें एकलपीठ के पांच जनवरी 2026 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं।
यह था मामला: तीसरे बच्चे के जन्म को लेकर दायर की गई थी याचिका
डॉ. पंकज कुमार यादव ने वर्ष 2023 में शिकायत की थी कि संबंधित प्रोफेसर के तीन जीवित बच्चे हैं और तीसरे बच्चे का जन्म एक जनवरी 2005 को हुआ था। यह जन्म उस कट-ऑफ तिथि (26 जनवरी 2001) के बाद हुआ, जिसके संबंध में मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के नियम 6(6) में प्रावधान किया गया है।
याचिका में दावा किया गया था कि तीसरे बच्चे के कारण उन्हें वर्ष 2005 में एसोसिएट प्रोफेसर और वर्ष 2015 में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति नहीं मिलनी चाहिए थी।
हाई कोर्ट ने कहा: लंबे समय बाद पदोन्नति निरस्त करना न्यायसंगत नहीं
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एकलपीठ ने अपने आदेश में यह माना था कि नियम 6 (6) केवल प्रारंभिक नियुक्ति पर ही नहीं बल्कि पदोन्नति पर भी लागू होता है। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता ने एकलपीठ के आदेश को गलत तरीके से पढ़ा और समझा।
