बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय में अकादमिक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का 33 घंटे तक चला घेराव और धरना प्रदर्शन आखिरकार समाप्त हो गया। आंदोलन के बाद शासन स्तर पर सकारात्मक पहल करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने आश्वासन दिया कि राजभवन द्वारा कुलपति को उनके शेष कार्यकाल तक अवकाश पर भेजा जाएगा। इसके बाद अभाविप ने धरना स्थगित करने की घोषणा की।
धरना स्थल पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री
आंदोलन के दूसरे दिन उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार स्वयं विश्वविद्यालय पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों व अभाविप कार्यकर्ताओं से चर्चा की। इस दौरान परिषद ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय में लंबे समय से लंबित शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की मांग की।
इन मुद्दों को लेकर था आंदोलन
अभाविप ने ज्ञापन में एमबीए सहित विभिन्न स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लंबित परीक्षा परिणाम, पुनर्मूल्यांकन में देरी, अव्यवस्थित शैक्षणिक कैलेंडर, पीएचडी प्रवेश परीक्षा, नर्सिंग कॉलेजों की लंबित प्रवेश प्रक्रिया, संबद्धता में पारदर्शिता, शिक्षकों की भर्ती और छात्रावासों की समस्याओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। परिषद का आरोप था कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली के कारण हजारों छात्र प्रभावित हो रहे हैं और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है।
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अभाविप ने बताया छात्रों के संघर्ष की जीत
कुलपति को अवकाश पर भेजने के आश्वासन के बाद अभाविप ने इसे विद्यार्थियों के संघर्ष की बड़ी जीत बताया। परिषद के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि यह केवल अभाविप की नहीं, बल्कि बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की जीत है। उन्होंने दावा किया कि राजभवन की ओर से यह भरोसा दिया गया है कि कुलगुरु का विश्वविद्यालय के कामकाज में आगे हस्तक्षेप नहीं होगा।
चेतावनी भी दी
अभाविप ने साफ किया कि फिलहाल धरना समाप्त किया गया है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। परिषद ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कुलगुरु के किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप की जानकारी सामने आती है तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा।
