उज्जैन के महिदपुर में शिप्रा नदी के बड़े पुल पर बुधवार को एक छोटी-सी चप्पल ने दो जिंदगियां लील लीं। नदी में गिरी चप्पल निकालने के लिए 14 वर्षीय भतीजा नदी में कूद गया। उसे बचाने के लिए काका ने भी छलांग लगा दी, लेकिन गहरे पानी और तेज बहाव ने दोनों को अपनी चपेट में ले लिया। ढाई घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने काका-भतीजे के शव बाहर निकाले।
नारायणखेड़ी निवासी 14 वर्षीय आयुष, पिता अशोक, पानी सप्लाई का काम करता था। बुधवार दोपहर वह शिप्रा नदी के बड़े पुल पर था। इसी दौरान उसकी चप्पल फिसलकर नदी में गिर गई। चप्पल निकालने के प्रयास में आयुष ने बिना सोचे-समझे पुल से नदी में छलांग लगा दी। आयुष को डूबता देख पास ही ट्रैक्टर लेकर खड़े उसके 25 वर्षीय काका आसाराम, पिता शोभाराम, ने एक पल भी नहीं गंवाया। उन्होंने ट्रैक्टर सड़क किनारे खड़ा किया और भतीजे को बचाने के लिए नदी में कूद पड़े।
देखते ही देखते काका-भतीजा पानी में समा गए
लेकिन शिप्रा नदी की गहराई और तेज बहाव के आगे दोनों बेबस हो गए। देखते ही देखते काका-भतीजा पानी में समा गए। घटना की सूचना मिलते ही महिदपुर पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों की मदद से बचाव अभियान शुरू किया गया। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों के शव नदी से बाहर निकाले जा सके।
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आसाराम की शादी महज एक महीने पहले ही हुई थी
इस हादसे से नारायणखेड़ी गांव में मातम पसरा हुआ है। सबसे दर्दनाक बात यह है कि मृतक आसाराम की शादी महज एक महीने पहले ही हुई थी। नई-नवेली दुल्हन का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, आयुष के घर में भी चीख-पुकार मची हुई है। महिदपुर पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए शासकीय अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

तलाश के दौरान की तस्वीर।

घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय लोग व परिजन।
