हाल ही में पूर्व मंत्री बालेंदु शुक्ला के सामाजिक संगठन ‘मुहब्बत की दुकान’ के बैनर तले रामाजी का पुरा स्थित हस्सू-हद्दू खां सभागार में मुस्लिम और अनुस …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 23 May 2026 12:35:04 PM (IST)Updated Date: Sat, 23 May 2026 01:14:33 PM (IST)

दिग्विजय का 'मिशन 2028' : ग्वालियर से मुस्लिम-दलित गठजोड़ की नई सियासी स्क्रिप्ट, 'मुहब्बत की दुकान' से वापसी की उम्मीद

HighLights

  1. ग्वालियर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नया दांव
  2. मंच पर सजी ‘मुहब्बत की दुकान’, भीतर नाराजगी
  3. पांच राज्यों के झटकों के बाद साख बचाने की कवायद

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में कांग्रेस को फिर से मजबूत आधार दिलाने के लिए नया राजनीतिक प्रयोग शुरू किया है। इसकी शुरुआत ग्वालियर-चंबल अंचल से की गई है, जहां मुस्लिम अल्पसंख्यक और अनुसूचित वर्ग को एक मंच पर लाकर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को फिर से संगठित करने की कोशिश दिखाई दे रही है।

स्थानीय स्तर पर पूर्व मंत्री बालेंदु शुक्ला के सामाजिक संगठन ‘मुहब्बत की दुकान’ के बैनर तले रामाजी का पुरा स्थित हस्सू-हद्दू खां सभागार में मुस्लिम और अनुसूचित जाति वर्ग का संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का आयोजन ऐसे क्षेत्र में किया गया, जहां दोनों वर्गों की उल्लेखनीय आबादी है। प्रदेश में मुस्लिम मतदाता लंबे समय से भाजपा से दूरी बनाए हुए हैं, जबकि अनुसूचित वर्ग का एक बड़ा हिस्सा एट्रोसिटी एक्ट और अन्य मुद्दों के बाद भाजपा से असंतोष जताता रहा है।

ग्वालियर-चंबल अंचल में यही दोनों वर्ग कांग्रेस की पारंपरिक ताकत माने जाते रहे हैं। कांग्रेस के लिए नए चुनावी रोडमैप की शुरुआती पटकथा को लेकर भी माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह सामाजिक संगठनों की आड़ में प्रदेशभर में इसी तरह के सम्मेलन आयोजित कर भाजपा के खिलाफ नया राजनीतिक माहौल बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हालांकि मंच पर मौजूद मुस्लिम नेता इस गठजोड़ को लेकर ज्यादा आशान्वित नहीं हैं। उनका मानना है कि कांग्रेस ने केवल मुस्लिम समाज को जेबी वोट बैंक समझा है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भले ही प्रदेश में वर्ष 2003 से पहले जैसा जनाधार नहीं बचा है। संगठन भी उन्हें चुनाव में मुख्य भूमिका की बजाय समन्वयक की भूमिका देकर किनारा कर लेती थी। इसके बाद भी वे अपने राजनीति के कौशल से राजनीति के केंद्र में रहते हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी ढाई वर्ष है। हाल ही पश्चिम-बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव हुए।

कांग्रेस केवल केरल को छोड़कर चारों राज्यों में हासिये पर चली गई। केवल सात राज्यों को छोड़कर सभी राज्यों में भाजपा का परचम लहरा रहा है। पश्चिम-बंगाल में सरकार बनाने के बाद भाजपा आत्मविश्वास से लबरेज है। इन विपरीत राजनीतिक हालातों में कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने के लिए कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा से नाराज चल रहे मुस्लिम और अनुसूचित जाति वर्ग का गठजोड़ वोट बैंक मिशन पर कार्य करना शुरू कर दिया है।

अंचल से की है इसकी शुरुआत

पूर्व मुख्यमंत्री ने इसकी शुरुआत ग्वालियर-चंबल अंचल से की है। मुहब्बत की दुकान संगठन ने 17 मई रविवार को हस्सू-हद्दू खां सभागार में मुस्लिम व अनुसूचित वर्ग का संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया गया। मंच पर दोनों वर्ग के कांग्रेस से जुड़े नेता मौजूद थे। इस सम्मेलन में दिग्विजय सिंह ने मुस्लिम व अनुसूचित जाति वर्ग के गठजोड़ को वर्तमान राजनीति में प्रभावी बताया। सम्मेलन में दोनों वर्ग के प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया।

मुस्लिम अल्पसंख्यकों का कांग्रेस ने कभी नहीं किया सम्मान

मंच पर मौजूद ग्रेटर ग्वालियर मोहर्रम एवं कर्बला इंतजमिया कमेटी के अध्यक्ष अख्तर हुसैन कुरैशी का कहना है कि ऐसे सम्मेलन जमीनी वास्तविकता से कोसों दूर हैं। मुस्लिम समाज हमेशा कांग्रेस के साथ खड़ा रहा है। इसके बाद भी उसे क्या मिला? आजादी के बाद से मुस्लिम समाज का कोई जिलाध्यक्ष नहीं बनाया गया।

इस सम्मेलन का मंतव्य कुछ भी रहा हो, लेकिन मंच से हमे अपनी बात रखने का अवसर तक नहीं दिया गया। केवल एक मुस्लिम के चेहरे के रूप में बैठा दिया गया। दलित वर्ग से भी कोई प्रभावशाली व्यक्तित्व मौजूद नहीं था। मुस्लिम समाज भी भाजपा के साथ जाने के लिए विवश हो रहा है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *