मोहर्रम के अवसर पर शनिवार को राजधानी भोपाल में पारंपरिक मातमी जुलूस निकाले जाएंगे। करबला की शहादत की याद में आयोजित इन जुलूसों में शहरभर से ताजिए, बुर्राक, सवारियां और इस्लामी परचम शामिल होंगे। बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस में शामिल होकर हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को याद करेंगे। मुख्य जुलूस फतेहगढ़ से शुरू होकर मोती मस्जिद, इमामीगेट, पीरगेट, भवानी चौक, रॉयल मार्केट, हमीदिया अस्पताल और कोहेफिजा होते हुए वीआईपी रोड स्थित करबला पहुंचेगा। शहर के अन्य इलाकों से निकलने वाले जुलूस भी पीरगेट क्षेत्र में एकत्रित होकर करबला के लिए रवाना होंगे।

चौराहों पर होंगी मजहबी तकरीरें

जुलूस मार्ग पर प्रमुख चौराहों पर उलेमा करबला की जंग, हजरत इमाम हुसैन की शहादत और उनके संदेश पर तकरीरें करेंगे। अन्य राज्यों से आए मेहमान उलेमा भी श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे। शुक्रवार रात शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और दरगाहों पर ताजियों ने सलामी की रस्म अदा की।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जुलूस को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे जुलूस मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

ट्रैफिक रहेगा प्रभावित

यातायात पुलिस ने पुराने शहर में विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है। दोपहर बाद इमामीगेट से पीरगेट, रॉयल मार्केट, हमीदिया अस्पताल, कोहेफिजा और करबला मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना है। भारत टॉकीज, अल्पना तिराहा, नादरा बस स्टैंड, शाहजहांनाबाद और भोपाल टॉकीज क्षेत्र में भी शाम से यातायात प्रभावित रहेगा।

भारी वाहनों पर रोक

पुराने शहर के भारत टॉकीज से करबला तक सभी प्रकार के भारी, मालवाहक और व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही 24 से 26 जून तक प्रतिदिन शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लागू रहेगी।

एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन के लिए वैकल्पिक मार्ग

प्रशासन ने एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं। यात्रियों से अपील की गई है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखें और पुलिस के निर्देशों का पालन करें।

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क्यों मनाया जाता है मोहर्रम

मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है। इसकी 10वीं तारीख, जिसे आशूरा कहा जाता है, इराक के करबला में वर्ष 680 ईस्वी में हुई उस ऐतिहासिक घटना की याद में मनाई जाती है, जब हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए शहादत दी थी। उनकी कुर्बानी को याद करते हुए हर वर्ष मातमी जुलूस निकाले जाते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।



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