डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर ग्वालियर में एक अनूठा और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। लक्ष्मीगंज स्थित ऐतिहासिक मेहराब साहब की तलैया पर सांसद भारत सिंह कुशवाह की अगुआई एवं कलेक्टर रुचिका चौहान की प्रेरणादायक मौजूदगी में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आमजन एक साथ उतरे।

किसी ने तसला थामा, किसी ने फावड़ा उठाया और किसी ने कुदाल संभाली। सब कतारबद्ध होकर तलैया की सफाई में जुट गए। यह दृश्य “मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा” की भावना को साकार कर रहा था। प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत इस सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

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जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने दिखाया जज्बा

इस सामूहिक श्रमदान में सांसद भारत सिंह कुशवाह, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, जीडीए उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया, अनिल सांखला, धर्मेंद्र तोमर ‘बिट्टू’, राजू पलैया, नगर निगम के पार्षदगण व जनप्रतिनिधियों ने कंधे से कंधा मिलाकर बढ़-चढ़कर श्रमदान किया। वहीं प्रशासनिक मोर्चे पर कलेक्टर रुचिका चौहान, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय, जिला पंचायत सीईओ सोजन सिंह रावत, अपर आयुक्त मनोज तोमर, अपर आयुक्त मुनीश सिकरवार, एसडीएम नरेन्द्र बाबू यादव एवं नरेश चंद्र गुप्ता सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे जोश के साथ श्रमदान की इस कतार में शामिल हुए। इनके साथ बड़ी संख्या में आम नागरिक भी इस पुनीत कार्य में सहभागी बने।

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ईंधन की बचत का भी दिया संदेश

गंगा दशहरा के पावन अवसर पर “जल गंगा संरक्षण अभियान” के तहत ग्वालियर में एक अनूठी पहल देखने को मिली। कलेक्टर के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते के लिए अपने – अपने वाहनों की बजाय एक ही बस में बैठकर सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे। साथ कार्यक्रम के बाद उसी बस से वापस आए कलेक्टर आम आदमी की तरह बस से अपने घर तक पहुंचीं।

सामूहिक श्रमदान ने दिया जल संरक्षण का सशक्त संदेश

इस आयोजन ने एक बड़ा संदेश दिया। जब शासन और समाज मिलकर चलते हैं, तो बदलाव जरूर आता है। ऐतिहासिक मेहराब साहब की तलैया की यह सफाई केवल एक जलाशय को स्वच्छ करने का प्रयास नहीं था। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए जल धरोहरों को सहेजने का संकल्प था। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ऐसे आयोजन समाज में जल संरक्षण की अलख जगा रहे हैं। साथ ही सहभागिता, एकजुटता और पर्यावरण चेतना को भी नई ऊर्जा दे रहे हैं।



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