नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश सहित जिले में खाद ई-टोकन प्रणाली से दिया जा रहा है। लेकिन यह प्रणाली किसानों के लिए मुश्किल का सबब बन रही है। क्योंकि ई-टोकन प्रणाली से उतनी ही खाद की मिल रही है जितना रकबे को वैज्ञानिक आधार पर जरूरत है।

यानि ज्यादा खाद नहीं मिलेगी। इससे किसान जो मनमाने तरीके से अधिक फसल लेने के लिए खाद देते थे, वह नहीं दे पा रहे हैं। यदि किसी तरह ई-टोकन प्रणाली से दो से तीन बार में अधिक खाद ले ली तो कृषि विभाग की टीम उनके घरों पर जांच करने के लिए पहुंच जाती है। तब किसान ने खाद क्यों अधिक ली, का स्पष्टीकरण देना पड़ता है।

ऐसे समझें मामला

डबरा के झाड़ोली गांव के एक किसान ने ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से पांच बीघा जमीन के लिए तीन बार खाद ले लिया। यह उसकी जरूरत से अधिक खाद था। चूंकि ई-टोकन से लिया गया खाद पोर्टल पर दर्ज रहता है, ऐसे में विभाग के अफसरों की नजर में आ गया। इसके बाद विभाग की टीम ने किसान के यहां जाकर खाद अधिक लेने का कारण पूछा। तब पता चला कि उसके पास कुल 22 बीघा जमीन है। लेकिन उसके नाम से पांच बीघा ही है। ऐसे में उसे खाद पांच बीघा के लिए ही मिलेगा। ऐसे में उसे अधिक खाद लेना पड़ा।

इसलिए भी है किसानों को समस्या

पूरी समस्या की जड़ ई-टोकन प्रणाली में फीड किया गया खाद का पैमाना है। दरअसल, कृषि वैज्ञानिकों की राय और फसलों की तकनीकी आवश्यकता के हिसाब से यह तय किया गया है कि प्रति बीघा या प्रति हेक्टेयर फसल को कितनी खाद की जरूरत होती है। इसी वैज्ञानिक गणना के आधार पर हर किसान की कुल जमीन के रकबे के अनुसार खाद का कोटा पोर्टल पर पहले से लाक रहता है।

किसानों का अपना पारंपरिक तजुर्बा और गणित है। किसान कृषि विशेषज्ञों की इस तकनीकी राय के विपरीत अपनी फसलों में अधिक मात्रा में खाद डालते आए हैं। उनका मानना है कि अंचल की मिट्टी और पानी के हिसाब से जब तक वे तय मात्रा से ज्यादा खाद नहीं देंगे, तब तक फसल की पैदावार अच्छी नहीं होगी। इस विरोधाभास के कारण किसानों को उनकी जरूरत के मुताबिक सोसायटियों और केंद्रों से अतिरिक्त खाद नहीं मिल पा रही है।

आगामी दिनों में बढ़ेगी समस्या

मानसून ने देश में दस्तक दे दी है। आगामी दिनों में अंचल में आ जाएगा। ऐसे में अंचल में धान, बाजरा सहित अन्य फसलों के लिए किसानों को खाद की जरूरत होगी। चूंकि ग्वालियर क्षेत्र में धान की खेती अधिक होती है। धान के लिए किसानों को खाद की जरूरत अधिक पड़ेगी। ऐसे में आगामी दिनों में खाद के लिए मारामारी हो सकती है।

जिले में खाद की स्थिति

  • कुल भंडार: लगभग 41,560 मीट्रिक टन
  • यूरिया: 22,996 टन
  • डीएपी : 5,621 टन
  • एनपीके : 6,808 टन

जिले के किसानों को ई-टोकन प्रणाली से खाद दिया जा रहा है। वर्तमान में ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से खाद लेने की मात्रा में कुछ छूट दी गई है। लेकिन जो किसान जरूरत से अधिक खाद ले रहे हैं, उनका डाटा आते ही, उनसे कारण पूछा जाता है कि आखिर क्यों अधिक खाद ले रहे हैं। ई-टोकन प्रणाली का उद्देश्य यह है कि एक तो खाद का गलत उपयोग न हो और किल्लत न हो, दूसरे किसान फसलों में उतनी ही खाद दें, जितनी जरूरत है। – आरबीएस जाटव, उप संचालक कृषि



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