मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी, किसानों की आय और सरकारी नीतियों को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर किसानों की अनदेखी और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पूर्व विधायक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव कुणाल चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार जिस साल को किसान कल्याण वर्ष बता रही है, वह वास्तव में किसान हैरान वर्ष बन गया है।

28 अप्रैल को बुधनी में बड़ा आंदोलन

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा। चौधरी ने घोषणा की कि 28 अप्रैल को बुधनी में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा, जो केंद्रीय कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र में होगा। इस आंदोलन में जीतू पटवारी और उमंग सिंघार भी शामिल होंगे।

खरीदी में देरी और कम लक्ष्य पर सवाल

कांग्रेस ने गेहूं खरीदी को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। चौधरी ने बताया कि प्रदेश में 19 लाख से ज्यादा किसानों ने करीब 160 लाख मीट्रिक टन गेहूं का पंजीयन कराया है, लेकिन सरकार ने सिर्फ 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया। उन्होंने कहा कि अब तक खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी है करीब 16 लाख मीट्रिक टन ही खरीदी हो सकी है। इस गति से लक्ष्य पूरा होना मुश्किल है, जबकि खरीदी की अंतिम तिथि नजदीक है।

नियमों और जुर्मानों से बढ़ी परेशानी

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार लगातार नए नियम लागू कर किसानों को उलझा रही है कभी पंजीयन, कभी सैटेलाइट सत्यापन तो कभी अन्य प्रक्रियाएं। नरवाई (पराली) के नाम पर किसानों पर जुर्माने लगाए जा रहे हैं, जबकि फसल नुकसान का सही सर्वे नहीं किया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि सर्वे में गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।

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भुगतान में देरी और गड़बड़ी के आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में खरीदी व्यवस्था में गड़बड़ी के उदाहरण भी सामने रखे गए। हरदा के एक वेयरहाउस में कागजों और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर बताया गया, वहीं राजगढ़ के जीरापुर में तुलाई के बाद भी भुगतान रोकने का मामला उठाया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि किसानों को उनके ही पैसे के लिए दफ्तर-दफ्तर भटकाया जा रहा है और सिस्टम पारदर्शी नहीं है।

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किसान कल्याण के नाम पर तमाशा

कुणाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश में किसानों की हालत दयनीय होती जा रही है, लेकिन सरकार किसान कल्याण वर्ष के नाम पर सिर्फ आयोजन और प्रचार कर रही है। उन्होंने रायसेन में हुए कार्यक्रम को उदाहरण बताते हुए कहा कि विधायकों को लाखों रुपये खर्च करने के लिए दिए जा रहे हैं, जबकि जमीन पर किसान संकट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह किसान उत्पीड़न वर्ष बन चुका है, जहां राहत के बजाय किसानों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है।

 



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