प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं में होने वाली एक ऐसी गंभीर लेकिन अनदेखी समस्या का इलाज अब राजधानी के सरकारी अस्पताल में शुरू हो गया है, जिसके लिए अब तक महिलाओं को महंगे निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था। कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में मध्यप्रदेश की पहली सरकारी कीगल चेयर शुरू की गई है, जिसके जरिए खांसने, छींकने, हंसने या वजन उठाने पर पेशाब कंट्रोल न रहने की समस्या का इलाज किया जा रहा है।
डिलीवरी के बाद कमजोर हो जाती हैं मांसपेशियां
काटजू अस्पताल की नोडल अधिकारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना दुबे ने बताया कि डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर की पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसके कारण करीब 25 से 30 फीसदी महिलाओं में पेशाब कंट्रोल न रहने की परेशानी सामने आती है। कई महिलाएं शर्म या झिझक के कारण इलाज नहीं करातीं, जबकि यह समस्या धीरे-धीरे मानसिक तनाव और सामाजिक असहजता की वजह बन जाती है।
क्या है कीगल चेयर और कैसे करता है काम
डॉ. दुबे के मुताबिक कीगल चेयर एक अत्याधुनिक तकनीक है, जो कमजोर मांसपेशियों को मजबूत बनाने का काम करती है। मरीज को केवल चेयर पर बैठना होता है और मशीन बिना किसी ऑपरेशन या दर्द के मांसपेशियों को सक्रिय करती है। करीब 5 से 6 सिटिंग में महिलाओं को काफी राहत मिल रही है। प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा पहली बार काटजू अस्पताल में शुरू हुई है।
निजी अस्पतालों में बेहद महंगा है इलाज
अब तक यह सुविधा केवल बड़े निजी अस्पतालों में उपलब्ध थी, जहां इलाज पर भारी खर्च आता था। ऐसे में गरीब और मध्यमवर्गीय महिलाओं के लिए यह सुविधा बड़ी राहत मानी जा रही है। अस्पताल में लगातार महिलाएं इस इलाज के लिए पहुंच रही हैं और उन्हें फायदा भी मिल रहा है।
महिलाओं के लिए बना विशेष शक्ति केंद्र
डॉ. रचना दुबे ने बताया कि काटजू अस्पताल में महिलाओं के लिए विशेष शक्ति केंद्र भी बनाया गया है। यहां बांझपन, अनियमित माहवारी, पीसीओएस, सर्वाइकल कैंसर जांच और रजोनिवृत्ति से जुड़ी समस्याओं का इलाज किया जा रहा है। अस्पताल में गर्भधारण से जुड़ी जांच और उपचार की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
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कैंसर की शुरुआती जांच और तुरंत इलाज
डॉ. दुबे ने बताया कि अस्पताल में महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच विशेष तकनीक से की जा रही है। यदि किसी महिला में शुरुआती लक्षण मिलते हैं तो तुरंत उपचार भी शुरू किया जाता है। इसके लिए आधुनिक मशीनें और प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
हर हफ्ते पहुंच रहीं बड़ी संख्या में महिलाएं
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार हर सप्ताह बड़ी संख्या में महिलाएं इलाज के लिए पहुंच रही हैं। बांझपन क्लिनिक में 70 से 80 मरीज आते हैं, जबकि अन्य जांच और उपचार के लिए प्रतिदिन 35 से 50 महिलाएं अस्पताल पहुंच रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जैसे-जैसे महिलाओं को इस सुविधा की जानकारी मिल रही है, मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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सरकारी अस्पताल में निजी अस्पताल जैसी सुविधा
डॉ. रचना दुबे ने बताया कि अस्पताल का उद्देश्य महिलाओं को सरकारी व्यवस्था में वही सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जो आमतौर पर बड़े निजी अस्पतालों में मिलती हैं। इसके लिए अस्पताल में आधुनिक मशीनें, परामर्श केंद्र और विशेष उपचार सुविधाएं शुरू की गई हैं।
