मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में मंगलवार को एक दिवसीय इंडो-फ्रेंच इन्वेस्टमेंट कॉन्क्लेव के बाद आयोजित राउंड टेबल बैठक में मध्य प्रदेश और फ्रांस के बीच औद्योगिक, तकनीकी और निवेश सहयोग को विस्तार देने पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश उद्योगपतियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को सदैव तत्पर है। राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में फ्रांस के राजदूत थियरी माथू ने कहा कि मध्य प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में फ्रांस की ओर से अधिकतम सहयोग प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को देखते हुए दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।
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2014 के बाद देश में एक नया भारत सामने आया
मुख्यमंत्री यादव ने भारत–फ्रांस संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की मित्रता ऐतिहासिक है और समय के साथ यह और प्रगाढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि पोखरण परमाणु परीक्षण के समय फ्रांस का समर्थन, राफेल डील तथा यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के मजबूत संबंधों का उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2014 के बाद देश में एक नया भारत उभरकर सामने आया है।
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एमपी में निवेश की अपार संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश की अपार संभावनाएं हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण राज्य की कनेक्टिविटी मजबूत है। पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक शांति और अनुकूल वातावरण निवेश को आकर्षित करते हैं। राज्य सरकार ने कृषि आधारित उद्योगों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश सरकार और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच एक एमओयू सहित 8 लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) प्रस्तुत किए गए। इनमें स्वास्थ्य, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
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कॉन्क्लेव में 150 प्रतिनिधियों ने भाग लिया
इंडो-फ्रेंच चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कॉन्क्लेव में लगभग 150 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के सीईओ, नीति निर्माता, राजनयिक एवं उद्योग प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रमुख प्रतिभागियों में डासाल्ट सिस्टम्स, सियस्ट्रा, एन्जी, पोमा रोपवेस, एआई वैनसिटी एवं मेडिकेप्स यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधि शामिल थे। राज्य शासन के अधिकारियों ने कहा कि मध्यप्रदेश की उद्योग हितैषी नीतियां, अधोसंरचना विकास, रक्षा एवं ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति राज्य को निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।
