ग्रामीणों ने बताया कि पहले वे अपने मवेशियों के गायब होने को टाइगरों का हमला मानते थे। हालांकि, बाद में उन्हें संदेह हुआ कि मवेशियों को जानबूझकर टाइगरों के आगे छोड़ा जा रहा है। समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व को मिलने वाले फंड के दुरुपयोग के लिए ग्रामीणों के मवेशियों को टाइगरों का निवाला बनाया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
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ज्ञापन के माध्यम से समाज ने कई अन्य मांगें भी रखीं। इनमें झिरना सरकार स्थान को संरक्षित करना, वन विभाग द्वारा कथित उत्पीड़न रोकना, वर्षों से खेती कर रहे किसानों को पट्टे देना, माधव टाइगर रिजर्व क्षेत्र के प्रभावित गांवों के परिवारों को पुनः सर्वे में शामिल कर विस्थापन एवं मुआवजा देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, धनसिंह कोतवाल, पन्नाधाय और भगवान देवनारायण की प्रतिमाएं स्थापित करने, ऐतिहासिक मंदिरों के संरक्षण, ईको सेंसिटिव जोन से प्रभावित गांवों के पुनर्वास तथा नरवर नगर वन क्षेत्र में पार्क जाने वाले रास्ते को बंद नहीं करने की मांग भी की गई।
वहीं, भैंस का पड़ा गायब होने के मामले को लेकर मंगलवार रात में भी ग्रामीणों ने सुरवाया थाना क्षेत्र में धरना प्रदर्शन किया था। इस मामले में सुरवाया थाना पुलिस अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर चुकी है।
