प्रदेश के चंबल अंचल में अवैध रेत खनन को लेकर लंबे समय से जारी हिंसा और अराजकता के बीच अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। वन आरक्षक की हत्या जैसी घटनाओं के बाद हालात की गंभीरता को देखते हुए रेत माफिया पर लगाम कसने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

कोर्ट की सख्ती के बाद अब 24 घंटे निगरानी

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मुरैना प्रशासन ने चंबल के संवेदनशील इलाकों में स्पेशल आर्म्ड फोर्स की तैनाती शुरू कर दी है। राजघाट पुल के आसपास, जहां सबसे ज्यादा अवैध खनन होता है, वहां अब एसएएफ के जवान 24 घंटे निगरानी करेंगे। ड्रोन के जरिए भी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। पुलिस, वन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है।

सरकार को भी मिली फटकार

कोर्ट ने चंबल नदी पर बने महत्वपूर्ण राजघाट पुल की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट में पेश तथ्यों के अनुसार अवैध खनन माफिया पुल के खंभों की नींव तक खोद रहे हैं, जिससे उसकी संरचना पर खतरा मंडरा रहा है। अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद चौंकाने वाली है। या तो राज्य सरकार अवैध खनन रोकने में पूरी तरह विफल है या फिर इसमें उसकी मिलीभगत है। 

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सरकार से पूछा है कि यदि पुल को नुकसान हुआ या वह गिरा तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। कोर्ट ने हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने, मशीनों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य करने और वन रक्षक हत्या मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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क्या था वन आरक्षक की हत्या का मामला

दरअसल यह पूरा मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें मुरैना के दिमनी थाना क्षेत्र के रानपुर गांव के पास अवैध रेत परिवहन रोकने गई वन विभाग की टीम पर हमला हुआ था। ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने वन आरक्षक हरकेश गुर्जर को जान-बूझकर कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था, जबकि यह पूरी वारदात सीसीटीवी में भी कैद हुई। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और माफियाओं के बढ़ते हौसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

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बरसों से जारी है रेत माफिया का आतंक

चंबल क्षेत्र में रेत माफियाओं का आतंक वर्षों से जारी है। पिछले एक दशक में पुलिस, वन विभाग और आम नागरिकों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। आईपीएस नरेंद्र कुमार की 2012 में हुई हत्या से लेकर हालिया मामलों तक, कुचलने, फायरिंग और हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

इतना ही नहीं, अवैध खनन का असर पर्यावरण पर भी गंभीर रूप से पड़ा है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में खनन के कारण घड़ियाल और डॉल्फिन जैसे जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि रेत में अंडे देने वाली इन प्रजातियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है।

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कार्रवाई बनाम जमीनी हकीकत

हालांकि प्रशासन अब सख्ती का दावा कर रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौती अब भी बरकरार है। अवैध खनन में राजनीतिक संरक्षण, अवैध वसूली और कमजोर निगरानी जैसे आरोप इस समस्या को और जटिल बना रहे हैं।

फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि रेत माफिया पर लगाम कसने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।



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