मध्यप्रदेश में इस महीने तबादलों पर लगी रोक हटाई जा सकती है। मुख्यमंत्री  मोहन यादव ने मुख्य सचिव अनुराग जैन और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द नई ट्रांसफर पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग को पहले ही तबादला नीति बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को बिना देरी किए स्पष्ट और ठोस नीति लाने को कहा है। जानकारी के अनुसार, मंत्रियों ने भी पिछले साल की तरह इस बार भी तबादलों पर लगी रोक हटाने की मांग रखी, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति दे दी है। हालांकि, सरकार इस बार केवल आवश्यक तबादले ही करेगी। नई व्यवस्था के तहत जिलों के प्रभारी मंत्रियों को अधिकारियों के तबादले का अधिकार दिया जा सकता है, जबकि विभागीय तबादले संबंधित विभागों के मंत्रियों के माध्यम से किए जाएंगे। माना जा रहा है कि 15 मई से तबादले पर से रोक हट सकती है। अगली कैबिनेट में नई ट्रांसफर पॉलिसी आ सकती है। 

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कैबिनेट में उठा पेयजल संकट का मुद्दा

बैठक के दौरान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने प्रदेश में पेयजल संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर जल संसाधन सूख रहे हैं और जल जीवन मिशन के तहत बनाए गए टैंकों में पानी नहीं है। इस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जिलों के कलेक्टरों को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल निर्देश जारी किए जाएं, ताकि कहीं भी पानी की कमी न हो। 

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प्रदेश में ‘राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड’ बनेगा 

बता दें मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और जन-कल्याण से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए 38 हजार 555 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की।  सरकार ने व्यापारियों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए ‘राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड’ और जिला स्तर पर समितियों के गठन को मंजूरी दी है। इस बोर्ड की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री करेंगे, जबकि इसमें औद्योगिक नीति, एमएसएमई सहित कई विभागों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही रिजर्व बैंक, नाबार्ड, एनएचएआई और एफएसएसएआई जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि और सीआईआई, एफआईसीसीआई, डीआईसीसीआई जैसे उद्योग संगठनों को भी जोड़ा जाएगा। हर जिले में बनने वाली समितियां स्थानीय व्यापारियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करेंगी। कैबिनेट ने “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 2442 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी भी दी है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराना, दलहनी फसलों का रकबा बढ़ाना और उत्पादन में वृद्धि करना है। सरकार को उम्मीद है कि इन फैसलों से व्यापार और कृषि दोनों क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी।

 



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