श्योपुर जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र के हारकुई बड़ागांव में मंगलवार को पुरानी रंजिश ने हिंसक रूप ले लिया। सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर रावत और जाटव समाज के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हुई झड़प में 24 लोग घायल हो गए, जिनमें 8 की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बीरपुर से जिला अस्पताल श्योपुर रेफर किया गया है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच सरकारी जमीन के एक टुकड़े को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा था। पंचायत स्तर पर कई बार समझौते की कोशिशें हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। मंगलवार सुबह उसी जमीन पर निर्माण को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक संघर्ष में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक पक्ष से करीब 20 और दूसरे पक्ष से 4 लोग इस झड़प में शामिल थे। दोनों ओर से लाठी, डंडे और कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया गया। शोर-शराबा सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। तब तक 24 लोग घायल हो चुके थे। घायलों को ग्रामीणों ने निजी वाहनों से बीरपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
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स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने बताया कि अधिकांश घायलों के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद 8 गंभीर घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि 16 का इलाज बीरपुर में जारी है। जिला अस्पताल में भर्ती घायलों में रावत समाज के 6 और जाटव समाज के 2 लोग शामिल हैं।
सूचना मिलते ही बीरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाद की जड़ सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर है। मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, घायलों में महिलाएं भी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले के आरोप लगाए हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर जमीन के दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं। फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बना हुआ है।
