मध्य प्रदेश अजब है, सबसे गजब है। फर्जी नियुक्ति आदेश के आधार पर एक नेता को छह दिन तक सत्ता और संगठन के नेता न सिर्फ बधाइयां देते रहे, बल्कि मिठाई भी खिलाते रहे। दरअसल मध्य प्रदेश में सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद का आदेश फर्जी निकला। भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल के नाम से एक नियुक्ति पत्र सोशल मीडिया वायरल हुआ। इसके बाद समर्थकों ने उन्हें बधाइयां देना शुरू कर दिया, पोस्टर लग गए और कई नेताओं से मुलाकातें भी होने लगीं। खास बात तो यह है कि सत्ता और संगठन के नेताओं को ही जानकारी नहीं लगी, वह गोयल को मिठाई खिलाते रहे। लेकिन बाद में सामने आया कि जिस आदेश के आधार पर पूरा घटनाक्रम चला, वह फर्जी है। 

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जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष कई निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में नियुक्त पदाधिकारियों को हटाने का निर्णय लिया था। हालांकि उस दौरान जारी सूची में सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नाम शामिल नहीं किया गया। इसी कारण यहां पुरानी नियुक्तियां तकनीकी रूप से समाप्त नहीं मानी गईं और प्रशासनिक स्थिति अस्पष्ट बनी रही। इसी के बीच अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाएं तेज हुईं और एक कथित नियुक्ति पत्र वायरल हो गया। मामला बढ़ने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो दस्तावेज में कई त्रुटियां सामने आईं। पत्र का प्रारूप सामान्य सरकारी आदेशों से अलग बताया गया है। साथ ही जिस अधिकारी के हस्ताक्षर दर्शाए गए, उस नाम का कोई संबंधित अधिकारी विभाग में पदस्थ ही नहीं है।  

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इस घटनाक्रम के बाद मंत्रालय स्तर पर हलचल बढ़ गई है। अब संबंधित विभाग पुराने बोर्ड को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और आगे की प्रक्रिया तय करने में जुटा है। बताया जा रहा है कि पहले पूर्व अध्यक्ष की नियुक्ति समाप्त करने संबंधी वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी, उसके बाद ही नई नियुक्ति पर फैसला संभव होगा। नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे ने  स्पष्ट किया है कि सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद के संबंध में उनके विभाग की तरफ से कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। 



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