मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा है कि 16 अप्रैल को संसद में प्रस्तावित विशेष सत्र नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। यह सत्र महिला आरक्षण से जुड़े ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के कल्याण के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। सीएम ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं-चाहे वह सेना हो, विमानन क्षेत्र हो या अंतरिक्ष। महिला आरक्षण लागू होने के बाद राजनीति में उनकी भागीदारी और अधिक मजबूत होगी तथा विकसित भारत के निर्माण में नारी शक्ति की भूमिका और प्रभावी बनेगी। 

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प्रदेश में बड़ा बदलाव संभव

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। मध्यप्रदेश में इसके 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले लागू होने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में राज्य विधानसभा में 230 सीटें हैं, जो परिसीमन के बाद बढ़कर 345 हो सकती हैं। इनमें से करीब 114 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। 

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एमपी विधानसभा में 27 महिला विधायक

फिलहाल विधानसभा में 27 महिला विधायक हैं, जिनमें 21 भाजपा और 6 कांग्रेस से हैं। नए प्रावधान के लागू होने के बाद यह संख्या चार गुना से अधिक बढ़ सकती है, जिससे प्रदेश की राजनीति में महिलाओं की भूमिका और मजबूत होगी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की संभावना है, जहां वर्तमान में केवल 5 महिला मंत्री हैं। 

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‘नारी शक्ति वंदन’ पखवाड़ा 25 अप्रैल तक

प्रदेश के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में 10 अप्रैल से 25 अप्रैल तक ‘नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है। इस दौरान अधिनियम से जुड़े प्रावधानों पर व्याख्यान, संवाद और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। छात्राओं को कानूनी अधिकार, साइबर सुरक्षा, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और वित्तीय साक्षरता की जानकारी दी जाएगी।

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स्वास्थ्य, आत्मरक्षा और कौशल विकास पर जोर

पखवाड़े के तहत आत्मरक्षा प्रशिक्षण, मार्शल आर्ट्स, जूडो-कराटे और ताइक्वांडो जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। साथ ही महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा हीमोग्लोबिन जांच, पोषण परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि महिलाओं का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

 



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