मध्यप्रदेश की धरती को आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि यहां के मूल में ईश्वरीय सत्ता का वास है। उन्होंने सनातन धर्म की तुलना सूर्य से करते हुए कहा कि उस पर प्रहार करने वाले का ही अहित होता है, सूर्य का कुछ भी नहीं बिगड़ता।

जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने मीडिया से बातचीत में मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए किए जा रहे कार्य अत्यंत प्रशंसनीय हैं। ऐसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक अखंडता को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

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आदि गुरु आदि शंकराचार्य की महिमा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास” के माध्यम से अद्वैत दर्शन और एकत्व के भाव को जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। उनके अनुसार, भगवान शंकराचार्य का दर्शन सभी को जोड़ता है, जहाँ जीव और ब्रह्म में कोई भेद नहीं है। सनातन धर्म पर होने वाले प्रहारों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी जी ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के मंत्र को दोहराया और कहा कि सभी जातियाँ समान और महान हैं।

जानिए कौन हैं स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज


स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज एक प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक गुरु, संत, लेखक और दार्शनिक हैं। वे जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर हैं और इस अखाड़े के प्रमुख व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। जूना अखाड़ा भारत में नागा साधुओं का सबसे प्राचीन और बड़ा अखाड़ा माना जाता है। स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने लाखों नागा साधुओं को दीक्षा दी है। उनका आश्रम हरिद्वार के कनखल और ऋषिकेश में स्थित है। वे हिंदू धर्म आचार्य सभा के अध्यक्ष हैं और वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलीजियस लीडर्स के बोर्ड मेंबर भी हैं।



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