प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देश की जनता से ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए आह्वान के बाद इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। शहर के प्रथम नागरिक ने निर्णय लिया है कि वे अब सप्ताह में कम से कम एक दिन अपने निजी या सरकारी वाहन का त्याग कर सार्वजनिक परिवहन के साधनों का उपयोग करेंगे। महापौर के इस कदम को शहर में पर्यावरण चेतना जगाने और यातायात के दबाव को कम करने की दिशा में एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
नो कार डे को मिलेगा बढ़ावा
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया है कि वे न केवल सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे, बल्कि सप्ताह में एक दिन पूरी तरह से ‘नो कार डे’ के संकल्प का पालन करने का प्रयास भी करेंगे। उन्होंने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर इंदौर की जनता से भी इस अभियान में शामिल होने का विनम्र आग्रह किया है। उनका मानना है कि यदि शहर के लोग स्वेच्छा से निजी वाहनों का उपयोग कम करें, तो इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि यातायात व्यवस्था भी सुगम होगी।
ईंधन की बचत और भविष्य की चिंता
अपने संबोधन में महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए देशवासियों से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के प्रयोग, लोक परिवहन के उपयोग और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की है। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि इंदौर, जिसे स्वयं प्रधानमंत्री ने ‘एक दौर’ कहा है, पिछले तीन वर्षों से ‘नो कार डे’ के माध्यम से पूरे देश को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता आ रहा है। यह नया निर्णय उसी परंपरा को और मजबूती प्रदान करने के लिए लिया गया है।
कारपूलिंग और जनभागीदारी की अपील
महापौर ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को यथासंभव कारपूलिंग को अपनाना चाहिए। उन्होंने लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे अपनी व्यस्त दिनचर्या में से कम से कम एक दिन सार्वजनिक वाहनों के लिए निकालें। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने रविवार को वैश्विक स्तर पर बढ़ते ईंधन के दामों और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए तेल और गैस पर निर्भरता कम करने की बात कही थी, जिसके बाद इंदौर महापौर ने यह पहल की है।
