भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाते हुए लोकायुक्त इंदौर की टीम ने लोक निर्माण विभाग (PWD) संभाग-1 के तीन बड़े अधिकारियों के विरुद्ध रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत कार्यपालन यंत्री जयदेव गौतम, अनुविभागीय अधिकारी (SDO) टी.के. जैन और उपयंत्री (Sub Engineer) अंशु दुबे को रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया है।
4 करोड़ के बिल पास करने के बदले मांगी थी रिश्वत
जानकारी के अनुसार, धार के सागोर अचाना रोड निवासी राजपाल सिंह पंवार, जो पटेल श्री इंटरप्राइजेस के संचालक और शासकीय ठेकेदार हैं, इस मामले के आवेदक हैं। उनकी फर्म ने वर्ष 2023 में पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर मैथवाड़ा-फोरलेन पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य करीब 4.73 करोड़ रुपये में लिया था। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद फर्म ने 4.51 करोड़ रुपये का अंतिम बिल भुगतान के लिए पेश किया था।
अधिकारियों ने तय किया था रिश्वत का हिस्सा
आवेदक का आरोप है कि अंतिम बिल के भुगतान के बदले अधिकारियों ने कमीशन के रूप में कुल 3.50 लाख रुपये की मांग की थी। इसमें कार्यपालन यंत्री जयदेव गौतम ने 1.50 लाख रुपये, SDO टी.के. जैन ने 1 लाख रुपये और उपयंत्री अंशु दुबे ने 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। ठेकेदार ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय से की, जिसके बाद भ्रष्टाचार के इस खेल को उजागर करने के लिए ट्रैप दल का गठन किया गया।
शासकीय आवास और कार्यालय से हुई रंगेहाथों गिरफ्तारी
नियोजित योजना के तहत लोकायुक्त की टीम ने दबिश दी। आरोपी जयदेव गौतम को उनके शासकीय निवास पर आवेदक से 1.50 लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया। वहीं, आरोपी टी.के. जैन को PWD कार्यालय के पोर्च के नीचे आवेदक के प्रतिनिधि से 1 लाख रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया। तीसरे आरोपी अंशु दुबे ने भी 1 लाख रुपये की मांग की थी, लेकिन आवेदक के पास उस समय पूरी राशि न होने के कारण उसने पैसे लेने से मना कर दिया था, हालांकि साक्ष्यों के आधार पर उन पर भी कार्रवाई की जा रही है।
भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज
सभी आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 एवं बीएनएस (BNS) 2023 की धारा 61(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। इस सफल कार्रवाई में कार्यवाहक निरीक्षक आशुतोष मिठास सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
