इंदौर शहर में साइबर ठगी के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। केवल मार्च माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो क्राइम ब्रांच के पास साइबर धोखाधड़ी की कुल 2600 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसके अनुसार शहर में हर दिन लगभग 87 लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। हालांकि पुलिस लगातार जागरूकता अभियान और साइबर पाठशाला के माध्यम से लोगों को सचेत कर रही है, लेकिन अपराधियों के नए-नए तरीके आम जनता पर भारी पड़ रहे हैं।

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शेयर ट्रेडिंग और अतिरिक्त आय का लालच फंसा रहा

ठगी के इन मामलों में सबसे ज्यादा मामले शेयर ट्रेडिंग के नाम पर सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधी अतिरिक्त आय का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए उकसाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन शिकार होने वालों में केवल कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, बड़े व्यापारी और बड़ी संख्या में घरेलू महिलाएं भी शामिल हैं। लालच के इसी चक्रव्यूह का फायदा उठाकर ठग लाखों रुपयों पर हाथ साफ कर रहे हैं।

ठगी के नए तरीके आ रहे

अपराधी अब केवल पुराने तरीकों तक सीमित नहीं हैं। अब बिजली कनेक्शन काटने, गैस कनेक्शन बंद होने या बैंक अधिकारी बनकर फोन करने के साथ-साथ एपीके (APK) फाइल का उपयोग किया जा रहा है। अपराधी पीड़ित को एक संदेहास्पद एपीके फाइल भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला जाता है। इसके बाद बिना किसी ओटीपी के खातों से पैसे निकाल लिए जाते हैं। अक्सर पीड़ित को इस बात की भनक तब लगती है जब बैंक से पैसा कटने का मैसेज प्राप्त होता है।

1930 पर तुरंत करें शिकायत

राहत की बात यह है कि क्राइम ब्रांच अब त्वरित कार्रवाई कर रही है। यदि पीड़ित समय रहते पुलिस तक पहुंचता है, तो पैसों की वापसी संभव हो पा रही है। पिछले तीन महीनों में पुलिस ने ठगों के बैंक खाते ब्लॉक करवाकर लगभग पौने दो करोड़ रुपये रिफंड करवाए हैं। इसके अलावा, अब पीड़ितों के लिए ई-एफआईआर की व्यवस्था भी शुरू की गई है। नेशनल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करते ही ई-एफआईआर दर्ज हो जाती है, जिसे बाद में संबंधित थाने में असल कायमी के लिए भेजा जाता है। इस नई व्यवस्था के कारण पिछले दस दिनों में ही इंदौर के विभिन्न थानों में 50 से अधिक केस दर्ज किए जा चुके हैं।



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