डेली कॉलेज में कुछ पूर्व छात्रों और गवर्निंग बोर्ड के पदाधिकारियों के बीच चल रहा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। कॉलेज के पूर्व छात्र राजेश अग्रवाल का कहना है कि बोर्ड में ओडीए (ओल्ड डेलियन एसोसिएशन) सदस्यों के चुनावों को समाप्त कर लोकतांत्रिक व्यवस्था खत्म की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओडीए के भी तीन टर्म से चुनाव नहीं हो पाए हैं और पसंद के लोगों को नामित कर दिया जाता है जिनके सामने कोई और खड़ा नहीं हो सकता।
बोर्ड अध्यक्ष ने एफआईआर वापस लेने से मना किया
पूर्व छात्रों ने एक सोशल मीडिया पेज बनाकर उस पर भी यह बातों को उठाया है। वहीं गवर्निंग बोर्ड के पदाधिकारियों ने अब इस मामले में एफआईआर दर्ज करवा दी है। डेली कॉलेज गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष विक्रम सिंह पवार ने कहा कि वह वॉइस ऑफ डीसी सोशल मीडिया पेज के संबंध में दायर एफआईआर वापस नहीं लेंगे। उन्होंने विरोधी पक्ष को खुले मंच पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि जून में होने वाले चुनावों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। बोर्ड पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में संशोधन इसीलिए किया गया है ताकि ओडीए (ओल्ड डेलियन एसोसिएशन) बोर्ड सदस्यों के चुनावों में होने वाली राजनीति से बचा जा सके। उनके अनुसार वॉइस ऑफ डीसी पेज से स्कूल की छवि धूमिल हुई है। यदि ओडीए अध्यक्ष व सचिव बोर्ड सदस्य होंगे, तो दोनों संस्थाओं में बेहतर समन्वय हो सकेगा।
बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने और नियुक्तियों पर भी स्पष्टीकरण दिया
बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने के विषय पर अध्यक्ष ने कहा कि नवंबर-दिसंबर में स्कूल में कई गतिविधियां होती हैं जो चुनाव की वजह से प्रभावित होती हैं। उससे बचने के लिए और वित्तीय वर्ष को ध्यान में रखते हुए जून में चुनाव कराने हेतु कार्यकाल बढ़ाया गया है। प्रिंसिपल पर दो पद संभालने के आरोपों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने उनके डीपीएस राजपुरा में निदेशक होने की जानकारी शुरू में ही दे दी थी।
सोशल मीडिया पेज पर पूर्व छात्रों ने रखा अपना पक्ष
मामले को लेकर पूर्व छात्रों के समूह का कहना है कि सोशल मीडिया का यह पेज पूर्व छात्रों द्वारा बनाया गया था, जिसके दो हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। पेज पर यह बात स्पष्ट लिखी है कि यह ऑफिशियल पेज नहीं है। उनका तर्क है कि प्रबंधन की कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों पर सवाल उठाए गए थे और किसी की मानहानि की कोशिश नहीं की गई और न ही किसी धर्म के बारे में आपत्तिजनक बात कही गई है। पूर्व छात्रों के अनुसार राजनीतिक व्यंग्य की तरह सवाल उठाने की कोशिश की गई थी और अभद्रता का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि इसमें काफी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं। इस गरमाए माहौल के बीच बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रेसिडेंट विक्रम सिंह पवार ने प्रदर्शन कर रहे ओल्ड डेलियंस को खुले तौर पर डिबेट की चुनौती दी है।
संविधान संशोधन को पवार ने कानूनी बताया
विक्रम सिंह पवार ने संविधान संशोधन की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह कानूनी बताया है। उन्होंने कहा कि लीगल टीम की सलाह के अनुसार पंद्रह दिन का अनिवार्य नोटिस पीरियड देने के बाद ही पूरी प्रक्रिया पूरी की गई। संशोधन को एजीएम में तीन-चौथाई बहुमत से पारित किया गया है और फिलहाल इसे सरकारी मंजूरी के लिए भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की गई है और इसमें किसी प्रकार की अवैधता नहीं है। पवार ने कहा कि ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन और डेली कॉलेज दो अलग-अलग स्वतंत्र निकाय हैं और वर्तमान बदलावों का उद्देश्य डबल इलेक्शन व्यवस्था खत्म कर एकल चुनाव प्रणाली लागू करना है।
शैक्षणिक उपलब्धियों को नजरअंदाज किया जा रहा
प्रेसिडेंट पवार ने इस बात पर नाराजगी जताई कि विवादों के बीच स्कूल की शैक्षणिक उपलब्धियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में दो छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा में 99.4 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि पचास प्रतिशत से अधिक छात्रों का परिणाम नब्बे प्रतिशत से ऊपर रहा। नए संशोधनों के फायदे बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन और डेली कॉलेज कमेटी के बीच समन्वय बेहतर होगा। कॉमन लीडरशिप होने से दोनों संस्थाएं एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम कर सकेंगी। उन्होंने तर्क दिया कि जब ओडीए में बोर्ड सर्वसम्मति से चुना जाता है तब कोई सवाल नहीं उठता, लेकिन डेली कॉलेज में निर्धारित प्रक्रिया का पालन होने के बावजूद विवाद खड़ा किया जा रहा है।
