महू में आईएएस के फार्म हाउस पर पकड़े गए जुआकांड में निलंबित हुए मानपुर के थाना प्रभारी को कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने उनका निलंबन आदेश रद्द कर दिया है और कहा कि आदेश पूरी तरह से मनमाना और दिखावटी है। इस मामले में पुलिस अधिकारियों ने थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। थाना प्रभारी लोकेन्द्र सिंह हिरोरे ने कोर्ट में इसे लेकर याचिका लगाई थी। कोर्ट के आदेश के बाद वे बहाल हो जाएंगे। निलंबित करने के बाद पुलिस विभाग ने उन्हें बुरहानपुर भेज दिया था।
निलंबित होने पर टीआई ने कोर्ट में याचिका लगाई थी और कहा था कि जुआकांड का मामला सामने आने के बाद उन पर दबाव था कि घटनाक्रम को किसी अन्य जगह का बताया जाए और आईएएस के फार्म हाउस का जिक्र एफआईआर में न हो। लेकिन एफआईआर में पूरी सच्चाई लिखी गई, तो रात में ही उनके निलंबन के आदेश जारी कर दिए गए।
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा था कि जब आईएएस के फार्म हाउस पर जुआ पकड़ा गया, तो उनके बयान क्यों नहीं लिए गए। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या आईएएस के फार्म हाउस पर सीसीटीवी नहीं है। इस पर कोर्ट को बताया गया कि वहां सीसीटीवी नहीं है। कोर्ट ने इसे लेकर भी आश्चर्य जताया था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रतिवादियों द्वारा इन आरोपों का खंडन नहीं किया गया। पूरे मामले में चुप्पी साधी गई। यह दर्शाता है कि निलंबन आदेश प्रतिशोधात्मक था। उच्च स्तर के आदेशों का पालन नहीं करने पर निलंबन किया गया।
आपको बता दें कि इंदौर के समीप महू में आईएएस वंदना वैद्य के फार्म हाउस पर छापा मारकर पुलिस ने 18 जुआरियों को पकड़ा था। 10 मार्च को पुलिस ने यह कार्रवाई की थी। आईएएस वंदना वैद्य इंदौर में भी पदस्थ रह चुकी हैं। छापा पड़ने पर वंदना वैद्य ने भी आश्चर्य जताया था और कहा था कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। चौकीदार ने जुआ खेलने वालों को फार्म हाउस किराए पर दिया था। पुलिस ने चौकीदार को भी इस मामले में गिरफ्तार किया था।आईएएस वंदना वैद्य के पति अम्बरीश वैद्य भी सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वंदना वैद्य फिलहाल वित्त विकास निगम की प्रबंध संचालक हैं।
