यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, इसके बावजूद प्रोजेक्ट का काम जमीन पर शुरू हो चुका है। इस परियोजना की लागत छह सौ करोड़ रुपये से अधिक है। छह किलोमीटर से ज्यादा लंबे इस कॉरिडोर पर अनुमानित रूप से केवल 8 से 10 प्रतिशत ट्रैफिक ही सीधे गुजर पाएगा, फिर भी इसका निर्माण जारी है। इसके लिए एलआईजी क्षेत्र में शेड लगाए जा चुके हैं और खुदाई का काम भी शुरू हो गया है। ट्रैफिक के बीच निर्माण कार्य होने के कारण यातायात प्रभावित होने की संभावना है।

 

इस कॉरिडोर की खुदाई में सबसे अधिक परेशानी गीताभवन चौराहे से जीपीओ के बीच आएगी, क्योंकि यहां जमीन पथरीली है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर बीच में ही नर्मदा पाइपलाइन मौजूद है, जिसे शिफ्ट करना होगा।

 

एलिवेटेड कॉरिडोर की लागत अब लगभग दोगुनी हो चुकी है। पहले इस प्रोजेक्ट की लागत 300 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन अब यह बढ़कर 600 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह कॉरिडोर एलआईजी चौराहे से नवलखा चौराहे तक लगभग छह किलोमीटर लंबाई में बनाया जाएगा। हाल ही में इस प्रोजेक्ट को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनप्रतिनिधियों की बैठक ली थी, जिसमें निर्णय लिया गया कि तीन चौराहों पर रैंप (भुजाएं) उतारी जाएंगी और रोटरी भी बनाई जाएगी।

 

करीब डेढ़ साल पहले हुए सर्वे में इस कॉरिडोर पर केवल 4 प्रतिशत ट्रैफिक लोड सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया था, लेकिन चार माह पहले हुई शहर विकास बैठक में इसे फिर मंजूरी दे दी गई। अब इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा नगर निगम एलआईजी से निरंजनपुर तक के हिस्से में डिवाइडर भी बना रहा है।

उल्लेखनीय है कि यह प्रोजेक्ट करीब 15 साल पहले यूपीए सरकार के शासनकाल में मंजूर हुआ था। बीआरटीएस पहले से बनने के कारण इस परियोजना को लेकर कई बार असमंजस की स्थिति बनी रही। बीआरटीएस कॉरिडोर पर एलिवेटेड कॉरिडोर की योजना, ट्रैफिक सर्वे और मिट्टी परीक्षण पर ही 5 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। मिट्टी परीक्षण पूरा हो चुका है और इस छह किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के निर्माण में लगभग तीन साल का समय लगेगा। एलिवेटेड कॉरिडोर का ठेका वर्ष 2021 में गुजरात की राजकमल बिल्डर्स को दिया गया था।



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