यह सवाल धार की फिज़ाओं में हमेशा से तैरता रहा है और हाईकोर्ट के भोजशाला को मंदिर मानने के फैसले के बाद मौजूं है कि भोजशाला के गर्भगृह से प्रतिमा लंदन कैसे पहुँची और अब कब आएगी। इससे जुड़ी एक खास खबर


Dhar Bhojshala: Goddess Vagdevi remained away from the land of Dhar for 124 years, when will she come to the t

लंदन के संग्रहालय में रखी गई मां वाग्देवी की प्रतिमा।
– फोटो : अमर उजाला



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हाईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर करार दिया है और सरकार को लंदन के संग्रहालय से वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने के प्रयास शुरू करने पर विचार करने के लिए कहा है। बगैर प्रतिमा के भोजशाला धारवासियों को सूनी लग रही है। वहाँ अखंड ज्योत जला दी गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने धार भोजशाला को अयोध्या के मंदिर की तरह भव्य बनाने और केंद्र सरकार के प्रयासों से लंदन से प्रतिमा को वापस लाने की बात कही है।

अरब सागर के रास्ते पहुँची थी लंदन

इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार धार से प्रतिमा 1902 में लंदन पहुँची थी। ब्रिटिश काल में लॉर्ड कर्जन धार और मांडू को देखने आए थे। तब भोजशाला की माँ वाग्देवी की मूर्ति देखकर वे प्रभावित हुए। संगमरमर की इस प्रतिमा को वे अरब सागर से जहाज़ के रास्ते लंदन ले गए। उससे पहले इस प्रतिमा को मुग़ल शासन काल में भोजशाला से हटा दिया गया था। यह प्रतिमा 1875 में ब्रिटिश अधिकारी मेजर विलियम किनकैड को मिली थी।



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