मध्य प्रदेश में स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया गुरुवार 19 जून से शुरू हो गई है, लेकिन आवेदन शुरू होने से पहले ही नई स्थानांतरण नीति को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नीति में रखी गई कड़ी शर्तों के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन करने से ही वंचित रह जाएंगे। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने कहा कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 19 जून से 23 जून तक चलेगी, लेकिन 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस, जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों पर प्रतिबंध और न्यूनतम तीन वर्ष की सेवा अवधि जैसी शर्तें शिक्षकों के लिए बड़ी बाधा बन गई हैं।
90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त पूरी नहीं कर पा रहे
उनका कहना है कि प्रदेश में अधिकांश शिक्षक 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त पूरी नहीं कर पा रहे हैं। कई स्थानों पर तकनीकी खामियों के कारण भी उपस्थिति प्रभावित हुई है। वहीं प्रदेश के बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना कार्य में संलग्न हैं, जिससे वे स्थानांतरण के लिए पात्र नहीं रहेंगे। इसके अलावा तीन वर्ष की सेवा अवधि की अनिवार्यता भी हजारों शिक्षकों को आवेदन से बाहर कर रही है।
करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन नहीं कर पाएंगे
शिक्षक संगठन का दावा है कि इन शर्तों के कारण स्वैच्छिक स्थानांतरण की इच्छा रखने वाले करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन नहीं कर पाएंगे। संगठन ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों की पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए नियमों में आवश्यक शिथिलता दी जाए। उपेन्द्र कौशल ने बताया कि कई शिक्षक वर्षों से अपने गृह जिले या सुविधाजनक स्थान पर स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि मौजूदा शर्तों में कोई राहत नहीं दी गई तो बड़ी संख्या में शिक्षक शासन की स्थानांतरण नीति का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे।
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23 जून तक चलेंगे आवेदन
स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल पर स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन 19 जून से 23 जून तक किए जा सकेंगे। इसी बीच शिक्षक संगठन ने सरकार से नियमों की समीक्षा कर पात्र शिक्षकों को राहत देने की मांग तेज कर दी है।