आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग जरा जरा सी परेशानियों में दवाएं लेने लगते हैं और एक समय के बाद बीमारियों और दवाओं के जाल में उलझ जाते हैं। यदि प्रकृति के करीब रहें और जीवनशैली में कुछ बदलाव करें तो कई बीमारियों और परेशानियों का हल आसानी से निकल आता है। इंदौर के बिलावली तालाब के किनारे एक विशेष योग सत्र और नेचर वॉक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम योगप्रभा संस्था की ओर से आयोजित किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रकृति के करीब लाना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में लोगों को स्वस्थ रहने के कई आसान टिप्स दिए गए।

इस दौरान बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और झील के शांत वातावरण में विभिन्न शारीरिक व मानसिक क्रियाओं का अभ्यास किया। सत्र में शामिल लोगों ने योग के साथ-साथ सूर्य नमस्कार जैसी पारंपरिक पद्धतियों को अपनाया। इसके अलावा रिवर्स वॉकिंग यानी उल्टा चलना और नंगे पैर जमीन पर चलने जैसी गतिविधियों के माध्यम से प्रकृति से जुड़ाव महसूस करने के तरीके सीखे।




Indore News Nature walk and yoga session at Bilavali Lake to promote wellness

ट्रेनर्स ने लोगों को दिए स्वस्थ रहने के टिप्स।
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर


जाल में फंसे कछुए को दिया नया जीवन

कार्यक्रम के दौरान एक विशेष घटनाक्रम भी देखने को मिला जब टीम के सदस्यों की नजर जाल में फंसे एक कछुए पर पड़ी। योग और प्रकृति प्रेम की भावना को चरितार्थ करते हुए प्रतिभागियों और आयोजकों की टीम ने तत्काल उस कछुए को सुरक्षित बाहर निकाला और वापस झील के पानी में छोड़ा। इस मानवीय कार्य के जरिए उपस्थित लोगों को निस्वार्थ सेवा और मूक प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता रखने की प्रेरणा दी गई। कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों ने बताया कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का भी एक माध्यम है।

स्वास्थ्य के लिए धरती पर नंगे पांव चलना जरूरी

इस सत्र में नंगे पैर धरती पर चलने यानी ग्राउंडिंग के फायदों पर विशेष चर्चा की गई। जानकारों ने बताया कि नंगे पैर चलने से शरीर की सूजन और पुराने दर्द में कमी आती है। यह तकनीक तनाव को कम करने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होती है जिससे नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके साथ ही बेहतर रक्त संचार, शरीर के संतुलन में सुधार और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी यह क्रिया काफी मददगार साबित होती है। प्रतिभागियों ने इन वैज्ञानिक तथ्यों को समझते हुए प्रकृति के साथ एकाकार होने का अभ्यास किया।

गीतों के साथ हुआ समापन

सत्र के अंतिम चरण में मनोरंजन और स्वस्थ जीवनशैली का संगम देखने को मिला। सभी प्रतिभागियों ने मनीष शुक्ला द्वारा प्रस्तुत किए गए सुरीले गीतों का आनंद लिया जिससे वातावरण और भी उत्साहजनक हो गया। समापन के अवसर पर सभी को प्राकृतिक फलों का ताजा जूस परोसा गया। कार्यक्रम की संचालिका प्रार्थना दुबे ने बताया कि इस आयोजन का एकमात्र लक्ष्य लोगों को योग और प्रकृति के मेल से एक संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। सत्र में भाग लेने वाले सभी लोगों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए इसे एक सुखद अनुभव बताया। 




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